TIL Desk लखनऊ:
लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में लव जिहाद मामले को लेकर शुक्रवार को उस वक़्त हंगामा खड़ा हो गया, जब उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव को कुलपति से मिलने के लिए कथित तौर पर लगभग 10 मिनट तक खड़ा रखा गया। आरोप है कि इसके बाद भी कुलपति से मुलाकात नहीं हो सकी। इससे नाराज उनके समर्थकों ने प्रशासनिक भवन के बाहर नारेबाजी की।
अपर्णा यादव ने प्रेस कांफ्रेंस के दौरान अपने बयान में कहा-में 10 मिनट तक खड़ी रही लेकिन मुझसे मिलने कोई भी नहीं आया। महिला आयोग को केजीएमयू ने क्या समझ रखा है। मैं तो कुछ जानकारी करने के लिए आई थी लेकिन मुझसे मिलने वॉइस चांसलर नही आई। पीड़िता से मेरी बात हुई थी उसने बताया केजीएमयू के एचडी के बताने के बाद में भी कोई सुनवाई नहीं हुई। केजीएमयू के प्रशासन के संपर्क में रमीज उद्दीन था। 2 दिन के बाद रमीज उद्दीन भाग गया था। पीड़िता को केजीएमयू के सीनियर डॉक्टर के द्वारा कहा गया कि आप महिला आयोग क्यों गई। उस व्यक्ति को बचाने के लिए व्यक्ति विशेष के द्वारा काम किया जा रहा है।
विशाखा कमेटी के द्वारा जारी रिपोर्ट पर अपर्णा यादव ने उठाए सवाल। जिन लोगों ने बयान दिया है उनके बयान बदलने के लिए दबाव दिया जा रहा है। केजीएमयू में महिलाओं के साथ छेड़छाड़ हो रही है धर्मांतरण हो रहा है यह सब क्या चल रहा है और यहां का प्रशासन मौन है। 2 साल से बिना लाइसेंस के केजीएमयू में ब्लड बैंक चल रहा है।
