TIL Desk लखनऊ:
दिनांक 30.01.2026 को अपराह्न 03:00 बजे होटल एलोरा, लालबाग, लखनऊ में अंजान आदमी पार्टी द्वारा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। प्रेस वार्ता में पार्टी के शीर्ष पदाधिकारियों एवं विधि विशेषज्ञों ने नए UGC संशोधन विधेयक (New UGC Bill) के विरुद्ध गंभीर आपत्तियाँ दर्ज कराते हुए इसे समाज को बाँटने वाला एवं छात्रों के भविष्य के लिए घातक बताया।
मुख्य वक्तव्य: अंजान आदमी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आशुतोष कुमार ने नए UGC संशोधन विधेयक का तार्किक एवं तथ्यात्मक आधार पर पुरज़ोर विरोध करते हुए कहा कि यदि केंद्र सरकार इस काले कानून को शीघ्र वापस नहीं लेती है, तो इससे विभिन्न जातियों के बीच वैमनस्य बढ़ेगा तथा विश्वविद्यालय परिसरों में टकराव की स्थिति उत्पन्न होगी।
उन्होंने आशंका जताई कि जिस प्रकार अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के दुरुपयोग के अनेक उदाहरण सामने आए हैं, उसी प्रकार यह नया कानून भी शिक्षा के मंदिरों में पढ़ने वाले सवर्ण छात्रों को झूठे मुकदमों में फँसाने का माध्यम बन सकता है।
उन्होंने कहा कि सवर्ण बच्चे पहले से ही आरक्षण की मार झेल रहे हैं, और अब इस प्रकार का नया कानून लाकर उन्हें अप्रत्यक्ष रूप से मानसिक, सामाजिक और शैक्षणिक रूप से नष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है। यदि सरकार ने यह कानून वापस नहीं लिया, तो अंजान आदमी पार्टी देशव्यापी आंदोलन के लिए बाध्य होगी।
पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष रंजना श्रीवास्तव ने कहा कि इतिहास गवाह है कि अंग्रेजों एवं मुगल शासकों द्वारा सदियों तक अत्याचार किए गए, किंतु क्या कभी उन ऐतिहासिक अत्याचारों के विरुद्ध कोई कानून बनाया गया?
उन्होंने प्रश्न उठाया कि फिर बार-बार सवर्ण समाज के विरुद्ध ही ऐसे विभाजनकारी और काले कानून क्यों लाए जा रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालयों में पहले से ही छात्र पढ़ाई के दबाव, प्रतिस्पर्धा और भविष्य की अनिश्चितता के कारण आत्महत्या जैसे गंभीर कदम उठा रहे हैं। ऐसे में इस प्रकार के कानूनों का अतिरिक्त दबाव छात्र कैसे सहन कर पाएँगे?
पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव डी. के. मिश्रा (वरिष्ठ अधिवक्ता, उच्च न्यायालय, लखनऊ) ने कहा कि एक अधिवक्ता के रूप में वे प्रतिदिन न्यायालयों में यह देखते हैं कि किस प्रकार
• SC/ST (Atrocity) Act
• Dowry Prohibition Act
का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने विष्णु तिवारी बनाम राज्य (आगरा प्रकरण) का उदाहरण देते हुए कहा कि कैसे वर्षों तक एक निर्दोष व्यक्ति को झूठे आरोपों में जेल में रहना पड़ा, और अंततः न्यायालय ने उसे बरी किया।
उन्होंने प्रश्न किया कि जब मौजूदा कानूनों का इतना दुरुपयोग हो रहा है, तो यह कैसे माना जा सकता है कि नए UGC कानून का दुरुपयोग सवर्ण छात्रों को परेशान करने के लिए नहीं किया जाएगा?
उन्होंने सरकार की नीति को अंग्रेजों की “Divide and Rule” नीति की पुनरावृत्ति बताया । हाई कोर्ट इलाहाबाद के अधिवक्ता श्री सत्येंद्र कुमार
(All India Advocate Welfare Association) के राष्ट्रीय सचिव ने सरकार की मंशा पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि जहाँ एक ओर विश्व के अन्य देश शिक्षा और अनुसंधान में तेज़ी से प्रगति कर रहे हैं, वहीं भारत में सरकारें ऐसे दमनकारी कानून लागू कर केवल वोट-बैंक की राजनीति कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि देश के विश्वविद्यालय पहले ही विश्व रैंकिंग में टॉप-100 से बाहर हैं, और अब इस प्रकार के दुराग्रही कानून लाकर सरकार भारतीय उच्च शिक्षा को और भी पीछे धकेलने का काम कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे कानून समाज को विभाजित कर देश को गृह-संघर्ष की दिशा में धकेल सकते हैं ।
प्रेस वार्ता में यह स्पष्ट किया गया कि देश के विश्वविद्यालयों में पहले से ही विभिन्न कठोर कानून प्रभावी हैं। ऐसे में एक और नया UGC कानून लाकर सरकार सवर्ण छात्रों को बलि का बकरा बनाकर अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेंकना चाहती है।
यदि समय रहते केंद्र सरकार ने इस काले कानून को वापस नहीं लिया, तो All India Advocate Welfare Association (AIAWA) एवं अंजान आदमी पार्टी पूरे देश में सड़कों पर उतरकर लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करेंगी। साथ ही साथ आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उनको याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित किया गया..|
