Madhya Pradesh, State

“उपयोगित जल प्रबंधन” कार्यशाला का हुआ आयोजन

भोपाल 

आयुक्त  संकेत भोंडवे ने कहा कि सीवरेज प्रबंधन के लिए एसबीआर और बायोनेस्ट जैसी अत्याधुनिक एवं सक्षम तकनीकों का समावेश उपयोगित जल प्रबंधन के लिए अत्यंत लाभदायक हैं। कम लागत वाली टिकाऊ प्रणालियों के माध्यम से मलजल शोधन संयंत्रों (एसटीपी) से निकलने वाले उपचारित जल का अनिवार्य रूप से पुनरुपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए । उन्होंने कहा कि नगरों की स्वच्छता और समग्र सौंदर्य के लिए नाला टैपिंग की भूमिका अत्यंत प्रासंगिक है, उच्च तकनीक और प्रकृति के सामंजस्य से इस क्षेत्र में प्रगति करना विभाग का प्राथमिक ध्येय है। उन्होंने संयंत्र परिसरों में वायु और पर्यावरण शुद्धि के लिए पीपल जैसे प्राकृतिक शोधक पौधों के रोपण तथा प्रकृति आधारित (नेचर-बेस्ड) तकनीकों को अपनाने पर भी विशेष बल दिया। आयुक्त  भोंडवे ने निर्देश दिए कि सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और इससे जुड़े विभिन्न तकनीकी घटकों की डिजाइन एवं ड्रॉइंग संबंधी विषयों का त्वरित और दक्षतापूर्ण समाधान किया जाए। स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के अंतर्गत प्रदेश के नगरों को पर्यावरण के अनुकूल और पूर्णतः स्वच्छ बनाने की दिशा में नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा होटल पलाश में "उपयोगित जल प्रबंधन" विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया।

अपर आयुक्त  शिशिर गेमावत ने कहा कि मध्यप्रदेश स्वच्छ भारत मिशन के विविध सोपानों पर सराहनीय और अनुकरणीय कार्य कर रहा है। उन्होंने उपयोगित जल प्रबंधन की परिकल्पना को मूर्त रूप देने के लिए निर्माण की डिजाइन और ड्रॉइंग की सटीकता को अत्यंत आवश्यक बताया। नगरीय निकायों की तकनीकी समस्याओं के त्वरित निराकरण के ध्येय से ही इस कार्यशाला का आयोजन किया गया है, जिसमें विषय-विशेषज्ञों के साथ एक प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने पर गहन विमर्श किया जा रहा है। प्रमुख अभियंता  प्रदीप मिश्रा ने कहा कि मलजल शोधन संयंत्र से प्रवाहित होने वाले जल की शुद्धता एवं गुणवत्ता बनाए रखना अपरिहार्य है, जिससे उपयोगित जल प्रबंधन का मूल उद्देश्य अपनी सार्थकता को प्राप्त कर सके।

तकनीकी सत्रों में वैज्ञानिक एवं विषय विशेषज्ञ प्रोफेसर  राजेश विनिवाल ने उपयोगित जल प्रबंधन के सूक्ष्म पहलुओं पर अपना सारगर्भित प्रस्तुतीकरण दिया।  कार्तिकेय तिवारी ने "पॉल्यूटेड नाला टू क्लीन वॉटर" (प्रदूषित नाले से स्वच्छ जल तक) विषय पर नवीन तकनीकें साझा कीं। कार्यशाला में 136 नगरीय निकायों के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट तथा इंटरसेप्शन एवं डाइवर्जन से जुड़े विविध घटकों की रूपरेखा पर व्यापक मंथन किया गया। कार्यशाला में संभागीय कार्यपालन यंत्री, संभागीय संयुक्त संचालक, पीडीएमसी टीम के सदस्य, डिजाइनर्स, कॉन्ट्रैक्टर्स और विभिन्न तकनीकी प्रदाता उपस्थित रहे। कार्यशाला का संचालन उप संचालक  नीलेश दुबे द्वारा किया गया।

 

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