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आम और जामुन से तैयार ‘जामरस’ को पेटेंट, हिसार के शोधकर्ताओं ने बनाई शुगर-फ्री वाइन

हिसार.

वाइन का बिक्री देश में तेजी से बढ़ रही है। वाइन बनाने वाली कंपनियां अपने प्रोडक्ट में अलग-अलग फ्लेवर में निकाल कर बेच रही है। वाइन की बढ़ती मांग और उसमें मौजूद एल्कोहल को लेकर भी हमेशा चर्चाएं रहती है।

उस कड़ी में हिसार के राजगढ़ रोड स्थित गुरु गोरखनाथ जी राजकीय महाविद्यालय के बायोटेक्नाेलाजी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मुकेश आर. जांगड़ा और बाटनी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. दीपिका गुलाटी ने बायोटेक्नोलोजी के विभाग के पूर्व प्रो. डॉ. केएस नेहरा के मार्गदर्शन में वाइन को तैयार किया।

10 फीसदी एल्कोहल कंटेंट है
वाइन को तैयार करने के बाद डॉ. मुकेश जांगड़ा और डॉ. दीपिका गुलाटी ने इसका पेटेंट करवा लिया है। शौध में पूर्व प्राचार्य डॉ. विवेक कुमार सैनी ने अहम भूमिका निभाई । इस वाइन में 9 से 10 प्रतिशत तक एल्कोहल कंटेंट है। जामुन और आम से बनाई गई इस वाइन को शोधार्थियों ने जामरस नाम दिया है। कमाल की बात है कि यह शुगर फ्री वाइन है। एंटीआक्सीडेंट गुणों से भरपूर है तथा इसमें टैनिन की मात्रा कम रखी गई है, जिससे इसे पारंपरिक वाइन की तुलना में अधिक संतुलित बनाया जा सका है।

महाविद्यालय के प्राचार्या डॉ. अंजू चौधरी और पूर्व प्राचार्य डॉ. विवेक कुमार सैनी ने भी शोध कार्य में सहयोग प्रदान किया। असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. दीपिका ने बताया कि प्राचार्या डॉ. अंजू चौधरी जब प्रोफेसर पद पर नियुक्त थी तब से वह उन्हें शोध के लिए प्रेरित करती है। शोधकर्ताओं ने बताया कि वे पिछले कई वर्षों से वाइन निर्माण से जुड़े प्रयोग कराते रहे हैं। इसी दौरान बाजरा और अदरक जैसी विभिन्न चीजों से भी वाइन तैयार करने के प्रयोग किए गए, लेकिन उनका पेटेंट नहीं कराया गया। इस बार आम और जामुन के विभिन्न अनुपातों के साथ परीक्षण किया गया। जिसके बाद उन्होंने प्राकृतिक व स्वास्थ्य अनुकूल कम टैनिन व ज्यादा एंटीआक्सीडेंट से बनाने वाली वाइन के तरीके को पेटेंट करवा लिया । उन्होंने बताया कि वाइन निर्माण की प्रक्रिया जनवरी में शुरू की गई थी और मार्च तक उत्पाद तैयार हो गया। इसके बाद मई में पेटेंट के लिए आवेदन किया गया। करीब एक वर्ष की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब इस शोध को आधिकारिक रूप से पेटेंट प्राप्त हुआ है।

केवल तीन प्राकृतिक अवयवों से तैयार की गई वाइन
बाटनी विभाग की डॉ. दीपिका गुलाटी एवं बायोटेक्नोलाजी विभाग की डॉ. मुकेश जांगड़ा ने बताया कि ‘जामरस’ वाइन केवल आम, जामुन और यीस्ट की सहायता से तैयार की गई है। इसमें किसी प्रकार के कृत्रिम रसायन या हानिकारक संरक्षक का उपयोग नहीं किया गया। एंटीआक्सीडेंट की मात्रा बढ़ाने और टैनिन की मात्रा कम रखने पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसे ठंडे तापमान या रेफ्रिजरेटर में रखने से लंबे समय तक सुरक्षित किया जा सकता है। हालांकि बाहर रखने से यह खराब हो सकती है।

स्वास्थ्य के लिए भी है फायदेमंद
फलों से तैयार इस वाइन में एंटीआक्सीडेंट गतिविधि अधिक है, जो शरीर की कोशिकाओं को क्षति से बचाने में सहायक हो सकती है। साथ ही उन्होंने कहा कि इसमें जीरो शुगर और कम कैलोरी है, इसलिए इसे फलों से बने एक प्रकार के फर्मेटेड जूस के रूप में भी देखा जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार सीमित मात्रा में सेवन रक्त संचार के लिए भी लाभकारी हो सकता है। बायोटेक्नोलाजी विभाग के पूर्व प्रोफेसर डॉ. केएस नेहरा ने बताया कि यह वाइन फ्रूट को फर्मेटेड करके फिल्टर किया जाता है।जिससें वाइन में फलों से मिलने वाले पोषण मौजूद रहते है। जो स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद रहता है । फिलहाल वाइन में 9 से 10 प्रतिशत एल्कोहल है पर भविष्य में इसे बढ़ा कर 13 प्रतिशत किया जाएगा। ताकि वाइन कमरे के तापमान में भी खराब ना हो।

महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. अंजू चौधरी ने इस उपलब्धि पर डॉ. मुकेश आर. जांगड़ा, डॉ. दीपिका गुलाटी तथा उनके मार्गदर्शक पूर्व प्रो. डॉ. केएस नेहरा को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि जब वह इसी महाविद्यालय में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थीं, तभी से वे शिक्षकों को शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में निरंतर कार्य करने के लिए प्रेरित करती रही हैं। उन्होंने कहा कि यह पेटेंट उसी सतत शोध संस्कृति का परिणाम है, जिसे महाविद्यालय में वर्षों से प्रोत्साहित किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि गुरु गोरखनाथ जी राजकीय महाविद्यालय में सदैव कार्य करने वाले एवं नवाचार को अपनाने वाले शिक्षकों और शोधकर्ताओं को प्रोत्साहित किया जाता है।

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