पिथौरागढ़
उत्तराखंड के सीमांत पिथौरागढ़ जिले की व्यास घाटी में भगवान शिव के धाम की प्रसिद्ध आदि कैलाश यात्रा इस वर्ष आठ मई को प्रदेश के तीन स्थानों से शुरू होगी. यात्रा की नोडल एजेंसी ‘कुमाऊं मंडल विकास निगम लिमिटेड’ (केएमवीएन) के महाप्रबंधक विजयनाथ शुक्ला ने बताया कि हल्द्वानी, टनकपुर और धारचूला से श्रद्धालुओं के कुल 15 जत्थे आदि कैलाश की यात्रा करेंगे.उन्होंने बताया हल्द्वानी से होने वाली आदि कैलाश यात्रा आठ दिन की होगी. टनकपुर से छह दिन और धारचूला से यात्रा पांच दिन में संपन्न होगी. विजयनाथ शुक्ला ने बताया यात्रा का पहला चरण 10 जून को समाप्त होगा.
आदि कैलाश यात्रा को पीएम मोदी ने दिया बढ़ावा: अधिकारियों के अनुसार, प्रधानमंत्री के आने से पहले हर साल करीब 2000 श्रद्धालु आदि कैलाश यात्रा पर आते थे. 2023 में मोदी के यहां आने के बाद तीर्थयात्रियों की संख्या 28,000 पहुंच गई. पिछले साल यह आंकड़ा 36,000 को पार कर गया.
उत्तराखंड में आदि कैलाश यात्रा 1 मई से शुरू करने की तैयारी है. मौसम अनुकूल रहा तो प्रशासन अप्रैल के आखिरी सप्ताह से इनर लाइन परमिट जारी कर सकता है. पिछले साल यहां 30 हजार से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे थे. ऐसे में इस बार और बड़ी संख्या में यात्रियों के आने की उम्मीद है.
आदि कैलाश पिथौरागढ़ जिले के धारचूला क्षेत्र की व्यास घाटी में स्थित है. नवंबर से मार्च तक यहां भारी बर्फबारी के कारण आवागमन बंद रहता है. सुरक्षा कारणों के चलते व्यास घाटी में छियालेख से आगे जाने के लिए इनर लाइन परमिट अनिवार्य होता है. जिसे तहसील प्रशासन जारी करता है. आदि कैलाश और ओम पर्वत की यात्रा के लिए इनर लाइन परमिट धारचूला स्थित एसडीएम कार्यालय से ऑफलाइन लिया जा सकता है. आवेदन के लिए आधार कार्ड, मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट और पासपोर्ट साइज फोटो जरूरी होते हैं. यात्रा के लिए ऑनलाइन आवेदन की भी सुविधा है.
आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शन के लिए आने वाले पर्यटकों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है. साल 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के बाद इस धार्मिक स्थल को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर पहचान मिली. इसके बाद यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है. साल 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड दौरे के दौरान आदि कैलाश क्षेत्र का भ्रमण किया था. तब उन्होंने पिथौरागढ़ जिले में स्थित आदि कैलाश और पार्वती कुंड में पूजा-अर्चना की, साथ ही कुमाऊं के प्रसिद्ध जागेश्वर धाम में भी दर्शन किए थे.
आदि कैलाश उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले की व्यास घाटी में भारत की सीमा के भीतर स्थित है, इसलिए यहां की यात्रा अपेक्षाकृत आसान मानी जाती है. इसके लिए केवल इनर लाइन परमिट, मेडिकल जांच और स्थानीय प्रशासन की अनुमति जरूरी होती है. सड़क बनने के बाद अब श्रद्धालु धारचूला, गुंजी और जोलिंगकोंग तक वाहनों से पहुंचकर पार्वती सरोवर और गौरी कुंड के साथ आदि कैलाश के दर्शन कर सकते हैं. कैलाश पर्वत तिब्बत (चीन) में स्थित है और उसके पास पवित्र मानसरोवर झील है. वहां की यात्रा अंतरराष्ट्रीय होने के कारण पासपोर्ट-वीजा और भारत सरकार की आधिकारिक प्रक्रिया से होकर गुजरती है. यह यात्रा अधिक कठिन मानी जाती है.
