नई दिल्ली
 जम्मू-कश्मीर कैडर खत्म कर आईएएस अफसरों को एजीएमयूटी (अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम, केंद्र शासित प्रदेश) कैडर में शामिल करने के बाद दिल्ली सरकार में अफसरों की संख्या बढ़ गई है। इस रैंक के अफसरों के लिए सरकारी आवास की संख्या अब कम पड़ रही है। इसलिए सरकार ओखला स्थित अपोलो हॉस्पिटल के पास 16,175.12 वर्ग मीटर में टाइप-5 व टाइप-6 के फ्लैट्स के निर्माण की योजना बना रही है। यहां दो टावर बनाए जाएंगे।

प्रत्येक टावर में 80-80 फ्लैट्स होंगे। दो मंजिला बेसमेंट पार्किंग की सुविधा भी होगी। इस प्रोजेक्ट पर कुल 319.72 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। रेजिडेंशियल टावर के निर्माण के लिए दो मॉडल चुने गए हैं, जिनमें एक अक्षरधाम के पास बना कॉमनवेल्थ गेम्स विलेज और दूसरा केंद्र सरकार की जीपीआरए कॉलोनियां हैं।

धारा 370 हटने के बाद बदला कैडर ढांचा
पीडब्ल्यूडी अफसरों के अनुसार, केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने के बाद सिविल सर्विसेज के जम्मू-कश्मीर कैडर को खत्म कर दिया था। जम्मू-कश्मीर कैडर को एजीएमयूटी कैडर में शामिल कर दिया गया है। ऐसे में दिल्ली सरकार में कार्यरत अफसरों की संख्या में इजाफा हो गया है।

ओखला में बनेंगे 160 अफसर फ्लैट
ऐसे में प्लान बनाया गया है कि ओखला के पास टाइप-5 के 80 और टाइप-6 के भी 80 फ्लैट्स बनाए जाएं। टाइप-5 के टावर में दो ब्लॉक होंगे, जिसमें एक ए-ब्लॉक और दूसरा बी-ब्लॉक होगा। दोनों टावर का निर्माण 16,175.12 वर्ग मीटर (3.9 एकड़) में किया जाएगा। अफसरों का कहना है कि जिस तरह से डीडीए ने अक्षरधाम के पास कॉमनवेल्थ गेम्स विलेज बनाया है, उस मॉडल की भी स्टडी की जा रही है। दूसरा मॉडल केंद्र सरकार की जीपीआरए कॉलोनियां है। दोनों में से किसी एक मॉडल के आधार पर ऑफिसर फ्लैट्स बनाए जाएंगे।

दिल्ली सरकार इस पर खर्च करेगी 319.72 करोड़ रुपये
दोनों टावर आसपास ही होंगे। दोनों के लिए कॉमन बेसमेंट पार्किंग बनाई जाएगी, जो दो मंजिला होगी। टावर-1 के निर्माण पर कुल 54.28 करोड़ और टावर-2 (ए व बी-ब्लॉक) के निर्माण पर 78.25 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। बेसमेंट पार्किंग के निर्माण पर 63.78 करोड़ रुपये खर्च होने का आकलन किया गया है। इसके अलावा दोनों टावर के चारों तरफ इंटरनल रोड, लैंडस्केपिंग व सौंदर्यीकरण किया जाएगा। इस कार्य पर कुल 9.40 करोड़ रुपये खर्च होने का आकलन किया गया है।