TIL Desk मास्को :👉यूक्रेन युद्ध और वैश्विक तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक हलचल सामने आ रही है। रूस के आधिकारिक मुख्यालय क्रेमलिन ने पुष्टि की है कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की राजधानी अबू धाबी में रूस, अमेरिका और यूक्रेन के बीच एक महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय (Trilateral) वार्ता आयोजित होने जा रही है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए संकेत दिए कि इस उच्च स्तरीय शांति बैठक में यूरोपीय देशों की भागीदारी से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। वैश्विक शांति की दिशा में इसे पिछले कई महीनों में सबसे बड़ा और गंभीर प्रयास माना जा रहा है।

क्रेमलिन के मुताबिक, अबू धाबी को एक न्यूट्रल और सुरक्षित कूटनीतिक मंच के रूप में चुना गया है। इस त्रिपक्षीय वार्ता का मुख्य उद्देश्य पिछले लंबे समय से जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक व्यावहारिक रोडमैप तैयार करना, युद्धविराम (Ceasefire) की संभावनाओं को तलाशना और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chains) में आ रही बाधाओं को दूर करना है। पेसकोव ने स्पष्ट किया कि रूस हमेशा से बातचीत के जरिए सुरक्षा चिंताओं को सुलझाने का पक्षधर रहा है, बशर्ते उसके रणनीतिक हितों का सम्मान किया जाए।

इस बैठक की सबसे खास बात यूरोप के प्रमुख देशों की संभावित भागीदारी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फ्रांस और जर्मनी जैसे देश इस वार्ता में पर्यवेक्षक (Observer) या मध्यस्थ के रूप में शामिल हो सकते हैं। चूंकि यह युद्ध सीधे तौर पर यूरोपीय सुरक्षा और ऊर्जा संकट से जुड़ा हुआ है, इसलिए यूरोपीय संघ (EU) की मौजूदगी इस कूटनीतिक प्रयास को और अधिक व्यावहारिक और मजबूत बनाएगी। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने भी इस बैठक को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं और कहा है कि वे कूटनीति के जरिए शांतिपूर्ण समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) इस पूरी प्रक्रिया में एक बेहद महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। यूएई ने इससे पहले भी रूस और यूक्रेन के बीच कैदियों की अदला-बदली और मानवीय सहायता पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई है। अबू धाबी में होने वाली इस महावार्ता पर अब पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। यदि यह वार्ता सफल रहती है, तो यह न केवल पूर्वी यूरोप में शांति बहाल करेगी, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को एक नई स्थिरता प्रदान करेगी।