रांची
झारखंड में देश में उपलब्ध कुल खनिजों के लिहाज से 40 प्रतिशत खनिज संपदा उपलब्ध है और इसके बूते कई नए उद्योगों की संभावनाएं भी दिख रही हैं। पुराने उद्योगों के साथ-साथ नई संभावनाओं के प्रति भी निवेशकों का आकर्षण बढ़ रहा है। राज्य सरकार भ्ज्ञी इस समृद्ध खनिज भंडार का लाभ उठाते हुए भविष्य की संभावनाओं को तराशने में जुट गई है।
केंद्र के साथ अपेक्षित सहयोग के वातावरण में युवाओं को नए उद्यमों के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। इधर, उद्योग विभाग ने सिंगल विंडो सिस्टम को भी दुरुस्त कर लिया है। विकास के लिए दूरदर्शी राजनीतिक नेतृत्व के साथ-साथ सक्रिय औद्योगिक नीति के संयोजन से तीव्र विकास के लिए प्रतिबद्धता दिख रही है। कुछ कमियां भी हैं जिनको दूर करने के लिए विभाग प्रतिबद्ध दिख रहा है
पिछले 26 वर्षों में राज्य में कई प्रकार के बदलाव हुए हैं जिससे उद्योगों पर भी असर पड़ा है। झारखंड में औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (रांची औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण, रियाडा), आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (आइडा) और बोकारो औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (बियाडा), राज्य खादी बोर्ड, झारखंड औद्योगिक अवसंरचना विकास निगम (जिडको) और झारक्राफ्ट जैसे संगठन राज्य के औद्योगीकरण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
व्यवसायियों की मदद इन केंद्रों से हो ही रही है, यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि नई कंपनियों को प्रशिक्षित मानव संपदा मिल सके। सूचना प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी, विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड), खाद्य प्रसंस्करण, डाउनस्ट्रीम प्रसंस्करण आदि क्षेत्रों में अपेक्षित प्रगति अभी तक हासिल नहीं हुई है। झारखंड में इन 26 वर्षों में औद्योगीकरण में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
इस दौरान राज्य में लगभग 28,424.06 करोड़ रुपये के निवेश से 26 मेगा उद्योग, 106 बड़े और मध्यम उद्योग तथा 18,109 सूक्ष्म और लघु उद्योग स्थापित किए गए हैं और अब तक लगभग 63,000 लोगों को इन उद्योगों में रोजगार मिला है।
इससे राज्य के राजस्व संग्रह में वृद्धि होने के साथ-साथ जमशेदपुर-सराइकेला-चाईबासा, रामगढ़-पतरातु-हजारीबाग, लातेहार-चंदवा, रांची-लोहारदगा, बोकारो-चंदनकियारी-धनबाद-गिरिडीह आदि क्षेत्रों में आम लोगों की आमदनी बढ़ी है और उनके जीवन स्तर में सुधार हुआ है।
नियमित और बड़े निवेश को सुनिश्चित करने के लिए, राज्य सरकार उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को झारखंड को पसंदीदा निवेश गंतव्य के रूप में चुनने के लिए राजी करने में सफल रही है। इसके परिणामस्वरूप, प्रमुख औद्योगिक घरानों ने राज्य सरकार के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं।
कई बाधाओं और कठिनाइयों के बावजूद, उद्योगों ने रैयतों के साथ सीधी बातचीत के माध्यम से लगभग 8,000 एकड़ भूमि का अधिग्रहण कर लिया है। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार ने भी इन उद्योगों को बिजली इकाइयों सहित लगभग 3,000 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई है। तमाम बड़े उद्योग पहले ही उत्पादन शुरू कर चुके हैं।
निर्माण से अब तक के मध्यकाल में 11वीं पंचवर्षीय योजना (2007-2012) के दौरान इस्पात उत्पादन 80 लाख टन से बढ़कर 120 लाख टन प्रति वर्ष से अधिक हो गया है और यह अभी भी इसी वार्षिक दर से बढ़ रहा है। झारखंड वर्तमान में देश में उत्पादित कुल इस्पात का लगभग 20-25% उत्पादन कर रहा है।
कई एकीकृत इस्पात संयंत्रों के प्रस्तावित विस्तार के साथ, राज्य 250 लाख मीट्रिक टन से अधिक इस्पात का उत्पादन करेगा और इस प्रकार भारत का इस्पात केंद्र बन जाएगा। यहां तक कि विभिन्न प्रकार के आटो ग्रेड इस्पात, जिनका पहले आयात किया जाता था, अब राज्य में ही उत्पादित किए जा रहे हैं।
इसी प्रकार, राज्य में एल्यूमिना का उत्पादन लगभग 80,000 एमटी से बढ़कर 4.5 लाख एमटी प्रतिवर्ष हो चुका है। सीमेंट निर्माण में भी उल्लेखनीय वृद्धि हासिल की जा चुकी है। राष्ट्रीय स्तर की कई कंपनियां झारखंड से उत्पादन का काम कर रही हैं।
झारखंड में रेशम उत्पादन के क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज हुई है। 2006 तक 100 मीट्रिक टन से भी कम उत्पादन की तुलना में 2010-11 के दौरान 716 मीट्रिक टन तसर रेशम के उत्पादन होना शुरू हुआ जो 2024-25 में 1356 मीट्रिक टन तक पहुंच गया था। इस क्षेत्र में अब तक सबसे अधिक रोजगार का भी सृजन हुआ है और लगभग 2.25 लाख लोग इससे जुड़ चुके हैं।
प्रति व्यक्ति आय 14 हजार से बढ़कर 1.25 लाख रुपये तक पहुंचा
झारखंड में पिछले दो दशकों से अधिक समय में जीएसडीपी 39 हजार करोड़ से बढ़कर 3.21 लाख करोड़ तक पहुंच चुका है। झारखंड में वित्तीय वर्ष 2025-26 में वास्तविक जीएसडीपी (स्थिर कीमतों पर) 3.21 लाख करोड़ रहने का अनुमान है, जिसमें करीब 6.17% की वृद्धि भी दर दर्ज की गई है।
वर्तमान कीमतों पर झारखंड का जीएसडीपी वर्ष 2000-01 में 39191.09 करोड़ रुपये से बढ़कर वर्ष 2010-11 में लगभग 120010.20 करोड़ रुपये हो गया था। इसके बाद के वर्षों में इसमें उत्तरोत्तर सुधार ही देखा गया है।
इसी प्रकार झारखंड की प्रति व्यक्ति वार्षिक आय भी वर्ष 2001-02 में 14392 रुपये से बढ़कर वर्ष 2010-11 में 38350 रुपये और फिर 2025-26 में 1.25 लाख रुपये तक पहुंच गया था।
खनन क्षेत्र में उत्पादन 2.10 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा
खान और खदानों के लिए प्रसिद्ध झारखंड में खनन और उत्खनन में उत्तरोत्तर वृद्धि देखी गई है। इस क्षेत्र का उत्पादन 2003-04 में 6523.4 करोड़ रुपये से बढ़कर 2009-10 में 10170.5 करोड़ रुपये हो गया है। यही आंकड़ा 2025-26 में 2.10 लाख करोड़ के ऊपर पहुंच गया।
वर्तमान विकास दर को बनाए रखने और इससे भी बेहतर विकास गति प्राप्त करने के लिए आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना आवश्यक है। चूंकि राज्य खनिज संसाधनों से समृद्ध है, इसलिए स्थानीय लोगों के अधिकतम लाभ के लिए मूल्यवर्धन सहित इनका अधिकतक उपयोग अनिवार्य है।
आर्थिक उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण के कारण औद्योगिक वातावरण में व्यापक परिवर्तन आया है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
क्लस्टर प्रणाली को बढ़ावा दिया जा रहा है, प्रदूषण संबंधी मानक और सख्त हो गए हैं। अलग राज्य बनने के बाद झारखंड औद्योगिक नीति 2001 के कार्यान्वयन से प्राप्त अनुभव औद्योगिक क्षेत्रों के विकास को लेकर नीतियों के निर्माण में कारगर साबित हुईं।
हाल के वर्षों के प्रमुख निवेश
1. बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी : हाल ही में झारखंड में ग्रीन स्टील, एआई, ग्रीन एनर्जी, डिजिटल बिजनेस, माइनिंग, एविएशन और पर्यटन जैसे क्षेत्रों से जुड़े 14 बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली है, जिनमें लगभग 99,639 करोड़ रुपये का निवेश होना है।
2. नई औद्योगिक नीतियां : राज्य सरकार ने औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए झारखंड औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति-2026 और झारखंड टेक्सटाइल, परिधान एवं फुटवियर नीति-2026 का ड्राफ्ट पेश किया है।
3. जीएसडीपी और अर्थव्यवस्था : वित्तीय वर्ष 2026 में झारखंड की जीएसडीपी करीब 5.6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है और अगले वर्ष में इसके 6.1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।
निजी क्षेत्र में आरक्षण का प्रविधान किया जा रहा लागू
झारखंड सरकार ने निजी क्षेत्र में 75 प्रतिशत सीटें स्थानीय युवाओं के लिए आरक्षित करने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के आलोक में श्रम, नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग ने अपनी तैयारियां शुरू भी कर दी हैं। निजी क्षेत्र की सभी कंपनियों को एक माह के भीतर स्थानीय उम्मीदवारों के नियोजन अधिनियम, 2021 के प्रविधानों के तहत अपना निबंधन कराना अनिवार्य किया गया है।
खासकर वैसे सभी कर्मियों का भी तीन माह के अंदर नामांकन कराना होगा, जिनका वेतन 40 हजार या इससे कम है। श्रम, नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग ने अधिनियम के इन प्रविधानों का सख्ती से लागू करने के निर्देश सभी जिला नियोजन पदाधिकारियों को दिए हैं।
झारखंड में नए उद्योगों के लिए प्रशिक्षित मानव बल तैयार हो रहा है। श्रम विभाग इसके लिए नियमित तौर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रहा है। योजनाएं बन रही हैं। युवाओं को प्रशिक्षित भी किया जा रहा है। राज्य सरकार युवाओं के साथ-साथ महिलाओं को भी प्रशिक्षित कर रही है।
-जितेंद्र कुमार सिंह, सचिव, श्रम विभाग।
एक नजर में
प्रशिक्षण के लिए पंजीकृत : 10,84,638
प्रशिक्षण के लिए निबंधित : 8,23,297
प्रशिक्षण प्राप्त युवा : 7,28,807
जिनका मूल्यांकन हो चुका : 6,00,256
प्रमाणित किए गए युवा : 5,71,065
जिन्हें रोजगार का आफर मिला : 3,68,943
वर्गवार प्रशिक्षित युवा
एससी : 10.9 प्रतिशत
एसटी : 24.0 प्रतिशत
आगीसी एक : 28.3 प्रतिशत
ओबीसी दो : 8.9 प्रतिशत
सामान्य : 28 प्रतिशत














