* ‘बारिश – आर्ट।म्यूजिक।मानसून।’ शनिवार, 26 सितंबर 2026 को होटल क्लार्क्स अवध, लखनऊ में
TIL Desk लखनऊ:👉 मानसून की विदाई के साथ ही लखनऊ में एक ऐसी शाम सजने जा रही है, जो बारिश को महज़ एक मौसम नहीं, बल्कि संगीत, कला, किस्सागोई, शिल्प, स्वाद, खुशबू और सांस्कृतिक स्मृतियों के जीवंत उत्सव के रूप में सामने लाएगी। ‘बारिश – आर्ट।म्यूजिक।मानसून।’ शनिवार, 26 सितंबर 2026 को होटल क्लार्क्स अवध, लखनऊ में अपने रंग बिखेरेगी।एक्सक्यूरेटर्स इवेंट्स द्वारा क्यूरेट एवं निर्मित यह विशेष शाम सावन की सांस्कृतिक विरासत और लखनऊ की तहज़ीब को एक अनूठे अनुभव में पिरोएगी। शाम की शुरुआत अस्करी नक़वी की भावपूर्ण और सूफ़ियाना संगीत प्रस्तुति से होगी। इसके बाद चर्चित कवि तथा संगीत एवं सिनेमा के अध्येता यतीन्द्र मिश्र अपनी प्रस्तुति के माध्यम से संगीत, साहित्य और सिनेमा के विविध रंगों से रूबरू कराएंगे। शाम को अपनी ऊर्जावान प्रस्तुति से द कुटले खान प्रोजेक्ट आगे बढ़ाएगा, जो दर्शकों को लोक और सूफ़ी संगीत की समृद्ध परंपराओं की जीवंत यात्रा पर ले जाएगा।कार्यक्रम का संचालन वाराणसी के सौरभ चक्रवर्ती करेंगे, जो प्रस्तुतियों, संवादों और शाम से जुड़े विभिन्न अनुभवों को एक सूत्र में पिरोते हुए इस सांस्कृतिक उत्सव को आगे बढ़ाएंगे।
लखनऊ में ‘बारिश’ का अनुभव संगीत और प्रस्तुतियों से आगे बढ़ते हुए सांस्कृतिक संवादों, ‘बारिश बाज़ार’, हस्तशिल्प, चुनिंदा खान-पान एवं पेय और विविध अनुभवात्मक गतिविधियों के माध्यम से जीवंत होगा। यह आयोजन लखनऊ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, उसकी तहज़ीब और जीवन के विविध रंगों को एक साझा मंच पर प्रस्तुत करेगा। दर्शकों को बारिश से जुड़ी स्मृतियों, भावनाओं, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के विभिन्न रूपों से रूबरू होने का अवसर मिलेगा। इन सभी अनुभवों के माध्यम से ‘बारिश’ सावन की बदलती मनोदशाओं और लखनऊ की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को एक साथ पिरोते हुए ऐसी शाम रचेगी, जिसे दर्शक केवल देखेंगे और सुनेंगे नहीं, बल्कि महसूस भी करेंगे।मानसून का बहु-शहरी उत्सव ‘बारिश’ दिल्ली से देश के विभिन्न शहरों तक अपनी यात्रा के दौरान भारत की साझा और समन्वयी संस्कृति में बारिश की विविध अभिव्यक्तियों को तलाशता आया है।
दिल्ली के सफल अध्यायों और जयपुर संस्करण के बाद अब ‘बारिश’ लखनऊ पहुंच रही है—एक ऐसे शहर में, जिसकी सांस्कृतिक पहचान मेहमाननवाज़ी, संगीत, शायरी, खान-पान, शिल्प और तहज़ीब की समृद्ध परंपराओं से गहराई से जुड़ी है। लखनऊ में ‘बारिश’ इसी सांस्कृतिक विरासत के विभिन्न रंगों को बारिश से जुड़ी स्मृतियों, भावनाओं और परंपराओं के साथ जोड़ते हुए एक अनूठा अनुभव प्रस्तुत करेगी।मिनहाल हसन, संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक, एक्सक्यूरेटर्स इवेंट्स, ने कहा, “‘बारिश’ हमारे लिए मानसून को केवल मौसम के रूप में देखने के बजाय उसकी उन तमाम परतों को समझने की एक यात्रा है, जो इसे स्मृतियों, संगीत, किस्सों, स्वादों और साझा सांस्कृतिक अनुभवों से जोड़ती हैं। हर शहर में बारिश के साथ जुड़ी एक अलग कहानी और एक विशिष्ट सांस्कृतिक संवेदना सामने आती है। लखनऊ में यह रिश्ता सावन, शायरी, संगीत, खान-पान और तहज़ीब के बेहद समृद्ध संसार में दिखाई देता है।
लखनऊ संस्करण के माध्यम से हमारा प्रयास इन जीवंत परंपराओं को समकालीन अनुभवों के साथ एक साथ लाने का है—ऐसी शाम रचने का, जो लखनऊ की सांस्कृतिक जड़ों से गहराई से जुड़ी हो, लेकिन अनुभव में ताज़ा, जीवंत और समकालीन भी महसूस हो।”शाम की शुरुआत अस्करी नक़वी की विशेष रूप से तैयार की गई ‘बारिश’ पर दास्तानगोई से होगी। दास्तानगोई की सशक्त और भावपूर्ण परंपरा के माध्यम से नक़वी बारिश के उन भावनात्मक रंगों को सामने लाएंगे, जिनमें इश्क़, इंतज़ार, नॉस्टेल्जिया, स्मृतियां, शायरी और बारिश में भीगी शामों की छोटी-छोटी खुशियां शामिल हैं। उनकी किस्सागोई दर्शकों को शब्दों, कल्पना और भावनाओं के सहारे मानसून को एक अलग अंदाज़ में महसूस करने का अवसर देगी और शाम की शुरुआत को आत्मीय, संवेदनशील और विचारशील माहौल प्रदान करेगी।इसके बाद यतीन्द्र मिश्र अपनी विशेष रूप से तैयार प्रस्तुति ‘कहानी गीतों की: बारिश संस्करण’ के साथ दर्शकों से रूबरू होंगे। यह प्रस्तुति भारतीय शास्त्रीय संगीत एवं संस्कृति में बारिश, संगीत और स्मृतियों के गहरे और चिरस्थायी रिश्ते को तलाशेगी। चर्चित हिंदी कवि और संगीत एवं सिनेमा के अध्येता यतीन्द्र मिश्र भारतीय संगीत और सांस्कृतिक परंपराओं की गहरी समझ को अपनी प्रस्तुति में पिरोते हैं।
किस्सों, गीतों और रोचक प्रसंगों के माध्यम से ‘कहानी गीतों की’ दर्शकों को संगीत और कविता में रची-बसी बारिश की अनेक छवियों, भावनाओं और रंगों की एक खूबसूरत यात्रा पर ले जाएगी।यतीन्द्र मिश्र हिंदी कविता के चार काव्य-संग्रहों के साथ-साथ भारतीय शास्त्रीय संगीत और सिनेमा पर कई महत्वपूर्ण पुस्तकों तथा अनुवाद कार्यों के लेखक हैं। उनकी नवीनतम पुस्तक ‘अख्तरी: सोज़ और साज़ का अफ़साना’ बेगम अख़्तर के नाम से प्रसिद्ध अख्तरी बाई फ़ैज़ाबादी के जीवन, समय और संगीत पर केंद्रित है। उनकी चर्चित पुस्तक ‘लता: सुर-गाथा’ को वर्ष 2017 में छह प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, जिनमें 64वां राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार – सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ लेखन (स्वर्ण कमल) और MAMI मुंबई फ़िल्म फेस्टिवल अवॉर्ड फॉर बेस्ट राइटिंग ऑन सिनेमा (2016–17) प्रमुख हैं।शाम की मुख्य संगीत प्रस्तुति होगी चर्चित संगीतकार कुटले ख़ान के नेतृत्व वाले ‘कुटले ख़ान प्रोजेक्ट’ की। राजस्थानी लोक और सूफ़ी संगीत की जीवंत परंपराओं को समकालीन ध्वनियों के साथ जोड़ता यह प्रोजेक्ट दर्शकों को भारत की समृद्ध लोक विरासत से जुड़ी एक ऊर्जावान और बहुरंगी संगीत यात्रा पर ले जाएगा। ‘बारिश’ के लखनऊ संस्करण में यह प्रस्तुति राजस्थान की लोक परंपराओं और अवध की आत्मीयता, संगीतप्रियता और तहज़ीब के बीच एक खूबसूरत सांस्कृतिक सेतु का निर्माण करेगी।
प्रस्तुतियों के अलावा, ‘बारिश लखनऊ’ दर्शकों के लिए कई अनूठे अनुभव भी लेकर आएगा। ‘बारिश बाज़ार’ में डिज़ाइनर्स, कारीगरों, लाइफ़स्टाइल ब्रांड्स और सजग एवं रचनात्मक उद्यमियों को एक साथ लाया जाएगा। जीवंत और आकर्षक माहौल में सजा यह बाज़ार दर्शकों को भारतीय शिल्प-कौशल, डिज़ाइन और समकालीन सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को करीब से देखने, जानने और अनुभव करने का अवसर देगा।शाम में चुनिंदा खान-पान और पेय, खुशबू, शिल्प और सांस्कृतिक संवादों के माध्यम से बारिश को कई इंद्रियों से महसूस करने के अवसर भी मिलेंगे। ये सभी अनुभव मिलकर ‘बारिश’ की विशिष्ट पहचान रचेंगे—एक ऐसा आयोजन, जिसे केवल देखा या सुना ही नहीं जाएगा, बल्कि महसूस किया जाएगा।













