बालाघाट
बालाघाट के किरनापुर पुलिस थाने में दर्ज चोरी के मामले को लेकर महिला से अमानवीय मारपीट का मामला सामने आया था। इसके बाद पुलिस की एसआईटी ने जांच की, जिसमें कानून का उल्लंघन कर महिला को जबरन जुर्म कबूल करने के लिए डराने-धमकाने सहित अन्य अनियमितताएं सामने आई।
चोरी की जांच में थाने लाई गई थी महिला
मामला 21 अगस्त को किरनापुर पोस्ट ऑफिस के सामने हुई 50 हजार रुपए की चोरी से जुड़ा है। पुलिस 2 सितंबर को टिमकीटोला निवासी सावित्री चौधरी और उनके पति कैलाश चौधरी को पूछताछ के लिए थाने लाई थी। आरोप है कि यहां दोनों के साथ मारपीट और महिला के साथ दुर्व्यवहार किया गया। 3 सितंबर को सावित्री को आरोपी बनाकर कोर्ट में पेश किया गया था।
समाज ने किया था थाने का घेराव
महिला से मारपीट के आरोपों के विरोध में मरार माली समाज ने 15 सितंबर को किरनापुर में आंदोलन किया था। इस दौरान थाने में पथराव और तोड़फोड़ भी हुई थी। पुलिस ने पूर्व सांसद कंकर मुंजारे, समाज अध्यक्ष रमेश पंचे, जिला पंचायत प्रतिनिधि, सरपंच समेत 63 नामजद और 100 से 200 अज्ञात लोगों के खिलाफ बलवा और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने सहित धाराओं में केस दर्ज किया था।
एसआईटी ने जांच में पाई अनियमितताएं
एसपी आदित्य मिश्रा के निर्देश पर डीएसपी प्रतिष्ठा राठौर के नेतृत्व में चार सदस्यीय एसआईटी ने चौधरी दंपती की शिकायत की जांच की। एसआईटी के अनुसार महिला को पर्याप्त कानूनी आधार के बिना थाने में रखा गया। रिपोर्ट में सूर्यास्त के बाद गिरफ्तारी और न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति से जुड़ी प्रक्रिया में भी अनियमितता सामने आने की बात कही गई है।
केवल इकबालिया बयान के आधार पर कार्रवाई
जांच रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने पर्याप्त परिस्थितिजन्य साक्ष्य जुटाए बिना महिला के खिलाफ कार्रवाई की। एसआईटी ने महिला और उसके पति को अवैधानिक रूप से थाने में रखने, डराने-धमकाने और अनुचित दबाव डालने के आरोपों की भी पुष्टि की है।
चार पुलिसकर्मियों पर इन धाराओं में केस
एसआईटी जांच के आधार पर पुलिस ने एसआई दामेन्द्र तुरकर, प्रआर आशीष बघेल, आरक्षक कपिल बघेल और महिला आरक्षक मेघा टेकाम के खिलाफ बीएनएस की धारा 127, 115(2), 296(बी), 351(1) और 3(5) के तहत एफआईआर दर्ज की है। मामले की जांच जारी है।
एक दिन पहले पीड़िता ने बताई थी पूरी घटना
एसआईटी रिपोर्ट सामने आने से एक दिन पहले सावित्री चौधरी ने पति कैलाश के साथ मीडिया के सामने थाने में हुई घटना के बारे में बताया था। पूर्व सांसद कंकर मुंजारे ने भी महिला को कोर्ट में पेश किए जाने के बाद अदालत की उस टिप्पणी का हवाला दिया था, जिसमें गिरफ्तारी को अवैधानिक बताते हुए महिला को रिहा किए जाने की बात कही गई थी।













