TIL Desk नई दिल्ली:👉केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस एडीए समूह से जुड़ी रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) के मामले में दूसरी चार्जशीट दाखिल की है। एजेंसी ने 1 अक्टूबर 2026 को मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र पेश किया। इनमें समूह के तीन वरिष्ठ अधिकारी, सात कंपनियां और एक चार्टर्ड अकाउंटेंट शामिल हैं।
सीबीआई की दूसरी चार्जशीट में आरएचएफएल के निदेशक और मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) अमित बापना, रिलायंस कैपिटल के समूह प्रबंध निदेशक एवं उपाध्यक्ष अमिताभ झुनझुनवाला और रिलायंस पावर के सीएफओ सुरेश नागराजन के नाम शामिल हैं। इनके अलावा रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर, रिलायंस पावर, रिलायंस बिग एंटरटेनमेंट, रिलायंस ब्रॉडकास्ट नेटवर्क, रिलायंस बिजनेस ब्रॉडकास्ट न्यूज होल्डिंग्स, रिलायंस मीडियावर्क्स फाइनेंशियल सर्विसेज और कुंजबिहारी डेवलपर्स को भी आरोपी बनाया गया है। आरएचएफएल के चार्टर्ड अकाउंटेंट और वैधानिक ऑडिटर विजय नपावालिया का नाम भी आरोपपत्र में शामिल है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, रिलायंस होम फाइनेंस द्वारा उधार लिए गए 7,429.16 करोड़ रुपये की राशि को कथित तौर पर मध्यस्थ और अन्य संस्थाओं के माध्यम से रिलायंस एडीए समूह की विभिन्न कंपनियों में स्थानांतरित किया गया। सीबीआई का आरोप है कि यह प्रक्रिया कर्ज देने वाले बैंकों और वित्तीय संस्थानों की निर्धारित शर्तों का उल्लंघन करके अपनाई गई। एजेंसी के अनुसार, इस कथित लेनदेन से कर्जदाताओं को नुकसान हुआ और आरोपियों तथा संबंधित संस्थाओं को अनुचित लाभ पहुंचा।
सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं के तहत आरोपपत्र दाखिल किया है। इससे पहले इस मामले में 9 जुलाई 2026 को चार आरोपियों के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल की गई थी। दूसरी चार्जशीट के बाद इस मामले में अब तक कुल 15 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल हो चुके हैं।
सीबीआई ने बताया कि इस मामले की शुरुआत यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की शिकायतों के आधार पर हुई थी। एजेंसी ने रिलायंस समूह की विभिन्न कंपनियों के खिलाफ कुल नौ एफआईआर भी दर्ज की हैं। इसके अतिरिक्त, अन्य आरोपियों की भूमिका और मामले से जुड़े दूसरे पहलुओं की जांच अभी जारी है। संबंधित मामलों की जांच की निगरानी सुप्रीम कोर्ट कर रहा है।












