TIL Desk नई दिल्ली:👉सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो रहे 'हर शनिवार बैंक छुट्टी' से जुड़े एक सरकारी दस्तावेज की सच्चाई अब पूरी तरह सामने आ चुकी है। भारत सरकार के आधिकारिक फैक्ट चेकर, PIB Fact Check ने स्पष्ट किया है कि इंटरनेट पर घूम रहा 'भारत का राजपत्र' (Gazette of India) पूरी तरह फर्जी और बनावटी है। वित्त मंत्रालय ने देश के सरकारी या निजी बैंकों के लिए 5-डे वर्किंग वीक (पांच दिवसीय कार्य सप्ताह) को लेकर ऐसी कोई भी आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की है।

वायरल गजट नोटिफिकेशन की क्या है हकीकत?

पिछले कुछ घंटों से व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया हैंडल्स पर वित्त मंत्रालय (वित्तीय सेवा विभाग) के नाम से एक कथित अधिसूचना साझा की जा रही थी। इस फर्जी दस्तावेज में 'नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881' की धारा 25 का हवाला देते हुए दावा किया गया था कि भारतीय स्टेट बैंक (SBI) समेत सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में प्रत्येक शनिवार को परमानेंट पब्लिक हॉलिडे घोषित कर दिया गया है।

इस भ्रम को दूर करते हुए पीआईबी ने साफ तौर पर कहा कि केंद्र सरकार द्वारा ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है। बैंकों में पहले की तरह ही दूसरे और चौथे शनिवार को ही अवकाश रहेगा, जबकि पहले, तीसरे और पांचवें शनिवार को बैंक शाखाएं सामान्य दिनों की तरह काम करती रहेंगी।

हड़ताल टलने के बाद अफवाहों का बाजार गर्म

गौरतलब है कि यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने हफ्ते में 5 दिन काम करने और सभी शनिवारों को छुट्टी देने की मांग को लेकर 28 से 30 सितंबर तक राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया था। हालांकि, 'इंडियन बैंक्स एसोसिएशन' (IBA) और यूनियनों के बीच हुई सकारात्मक बातचीत के बाद इस हड़ताल को टाल दिया गया था।

दोनों पक्षों के बीच इस बात पर सहमति बनी है कि इस लंबित मांग पर विचार करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा। हड़ताल टलने के इसी घटनाक्रम का फायदा उठाकर शरारती तत्वों ने सोशल मीडिया पर यह फर्जी गजट लेटर बनाकर फैला दिया, जिससे आम जनता और बैंक कर्मचारियों के बीच भारी भ्रम की स्थिति पैदा हो गई।

सरकार ने साफ किया है कि बैंकिंग सेवाओं को सुचारू रखना और ग्राहकों की सुविधा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। जब तक सरकार की ओर से आधिकारिक तौर पर कोई घोषणा नहीं होती, तब तक पुराने नियम ही प्रभावी रहेंगे।