• सरकार महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास पर काम कर रही है क्योंकि महिलाओं के सशक्तीकरण से समाज का सशक्तीकरण होता है - मंत्री
  • युवाओं को भारत के भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों और देश की प्रगति के लिए बड़े सपने देखने की जिज्ञासा और उत्साह को अपनाना चाहिए - शुभांशु शुक्ला, ग्रुप कैप्टन, भारतीय वायुसेना और अंतरिक्ष यात्री

TIL Desk नई दिल्ली:👉 विभिन्न सत्रों के दौरान संसद में व्यवधान और शोर-शराबा जीवंत लोकतंत्र का एक स्वस्थ संकेत है क्योंकि बहस और चर्चा संसदीय लोकतंत्र का हिस्सा हैं। "अगर संसद में शोरगुल और व्यवधान न हो, तो और कहाँ होगा, क्योंकि एक जीवंत लोकतंत्र में राष्ट्र के हित के लिए गरमागरम बहसें होनी ज़रूरी हैं। हम बहस और चर्चा चाहते हैं, लेकिन भौतिक अवरोध महत्वपूर्ण विधेयकों के पारित होने में बाधा डालते हैं और इससे संसद की उत्पादकता प्रभावित होती है।

सरकार कई ज़रूरी विधेयकों को बिना चर्चा के पारित करने के लिए मजबूर है," केंद्रीय संसदीय और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने देश की व्यवसायी महिलाओं के शीर्ष निकाय, फिक्की लेडीज़ ऑर्गनाइज़ेशन (FLO) द्वारा आयोजित 'फ्यूचर फ्रंटियर्स कॉन्क्लेव' में बोलते हुए कहा। रिजिजू ने कहा, "हाल ही में संपन्न संसद का मानसून सत्र देश और सरकार के लिए बेहद फलदायी रहा। विरोध या असहमति व्यक्त करना अपनी बात कहने का एक लोकतांत्रिक तरीका है, लेकिन संसद में सरकार के काम में बाधा डालना और उसे रोकना अलोकतांत्रिक है। मानसून सत्र के दौरान, लोकसभा की उत्पादकता 31 प्रतिशत और राज्यसभा की 39 प्रतिशत रही। सत्र के दौरान लोकसभा में 14 विधेयक पेश किए गए। इनमें से 12 विधेयक लोकसभा और 15 विधेयक राज्यसभा द्वारा पारित किए गए। संसद द्वारा कुल 15 विधेयक पारित किए गए।"

उन्होंने आगे कहा, "नरेंद्र मोदी सरकार हमेशा से महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास और समग्र समाज के सशक्तिकरण के लिए काम करती रही है। देश के विकास में महिलाओं का योगदान महत्वपूर्ण है क्योंकि वे हमारी आधी आबादी हैं।"

“भारतीय युवाओं और महिलाओं को जिज्ञासु होना चाहिए और अंतरिक्ष अन्वेषण तथा राष्ट्रीय विकास के इस "स्वर्णिम समय" का लाभ उठाना चाहिए। अपने अंतरिक्ष मिशन के दौरान मैंने भारत के भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए सामूहिक प्रयास और बड़े सपने देखने के महत्व को समझा। समावेशिता और अवसर की भावना, कभी हार न मानने और अन्वेषण व नवाचार की भावना को अपनाने का महत्व, युवाओं को यह विश्वास दिलाता है कि वे भी अंतरिक्ष यात्री बन सकते हैं और अंतरिक्ष में भारत के उज्ज्वल भविष्य में योगदान दे सकते हैं।” इस अवसर पर बोलते हुए भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन और अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने कहा।“फिक्कीफ्लो का कार्य सशक्तिकरण के संपूर्ण क्षेत्र में फैला हुआ है, मूल रूप से - ग्रामीण भारत में महिलाओं को कौशल प्रदान करना, आजीविका को बढ़ावा देना और वित्तीय साक्षरता सुनिश्चित करना ताकि कोई भी महिला पीछे न छूटे। उद्यम में - उद्यमियों को सलाह देना, बाज़ार तक पहुँच बनाना और छोटे व्यवसायों और स्टार्ट-अप के लिए डिजिटल परिवर्तन को आगे बढ़ाना। नीतिगत मंच पर - लैंगिक समानता, कॉर्पोरेट नेतृत्व और समावेशी राष्ट्रीय विकास की वकालत करना।” कॉन्क्लेव में बोलते हुए फिक्की फ्लो की अध्यक्ष पूनम शर्मा ने कहा।

शर्मा ने कहा, "राष्ट्रीय स्तर पर, हम एफएलओ स्टार्ट-अप, एफएलओ एमएसएमई, एफएलओ हैंडलूम एंड हैंडीक्राफ्ट, एफएलओ डिजिटल इनिशिएटिव, एफएलओ फाइनेंशियल लिटरेसी, एफएलओ वुमन डायरेक्टर्स, एफएलओ रूरल एंटरप्राइजेज और एफएलओ इंडस्ट्री-एकेडमिया इनिशिएटिव जैसी पहलों को बढ़ावा देते हैं। आज के सम्मेलन में दो प्रमुख प्रयास मुख्य आकर्षण होंगे: एफएलओ सस्टेनेबिलिटी इनिशिएटिव और एफएलओ वीमेन इन। विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) में महिलाओं को प्रोत्साहित करने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा, जिसमें जलवायु-तकनीकी समाधानों में अग्रणी भूमिका, अनुसंधान को आगे बढ़ाने और अगली पीढ़ी के सतत नवाचारों को आकार देने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को मान्यता दी जाएगी।"

सम्मेलन के अन्य मुख्य आकर्षणों में आध्यात्मिक नेता बीके शिवानी द्वारा संबोधित किया गया, डॉ. किरण बेदी, शोम्बी शार्प, दीपा सिंह बगई, सुनील सेठी और सलोना चांदना सहित प्रख्यात वक्ताओं द्वारा पैनल चर्चा की गई।

बाद में, राष्ट्र निर्माता फिक्की एफएलओ पुरस्कार गूंज की सह-संस्थापक डॉ. मीनाक्षी गुप्ता, गंगा राम अस्पताल के डॉ. सौमित्र रावत, नेक्स्ट टॉपर्स के सीईओ दिगराज सिंह राजपूत, वैज्ञानिक डॉ. रुक्मणी कृष्णमूर्ति को प्रदान किए गए।

इस अवसर पर फिक्की एफएलओ की वरिष्ठ उपाध्यक्ष पूजा गर्ग और फिक्की एफएलओ की राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष स्मृति पुरी तथा पूर्व अध्यक्ष उपस्थित थे।