* एक्सेल एंटरटेनमेंट की ‘बूंग’ ने वॉशिंगटन डीसी में हुए साउथ एशियन फिल्म, लिटरेरी एंड कल्चरल फेस्टिवल में बेस्ट फीचर फिल्म का अवॉर्ड जीता, वहीं गुगुन किपगेन को बेस्ट यंग टैलेंट का अवॉर्ड मिला!
TIL Desk Entertainment:👉एक्सेल एंटरटेनमेंट, चॉकबोर्ड एंटरटेनमेंट और सूटेबल पिक्चर्स की फ़िल्म 'बूंग' ने साउथ एशियन फ़िल्म, लिटरेरी और कल्चरल फ़ेस्टिवल में एक बड़ी जीत अपने नाम की है। इस खास मौके पर फिल्म को 'बेस्ट फ़ीचर फ़िल्म' का अवॉर्ड मिला है जबकि गुगुन किपजेन ने 'बेस्ट यंग टैलेंट' का अवॉर्ड हासिल किया है। बता दे कि यह सबसे ज्यादा कमाई करने वाली मणिपुरी फिल्म बन गई है क्योंकि इसे थियेटर्स में फिर से रिलीज करने के बाद बेहद अच्छा रिस्पांस मिला जिसके तहत इसने देखते ही देखते एक करोड़ की कमाई अपने नाम कर इतिहास रच दिया। ऐसे में अब हासिल हुई यह जीत फिल्म के लिए बेहद खास है।
ऐसे में एक्सेल एंटरटेनमेंट ने सोशल मीडिया पर 'बूंग' की टीम को साउथ एशियन फ़िल्म, लिटरेरी एंड कल्चरल फ़ेस्टिवल में मिली 2 बड़ी जीत के लिए बधाई देते हुए कैप्शन में लिखा है:
"'बूंग' ने @dcsaaci में बेस्ट फ़ीचर फ़िल्म और बेस्ट यंग टैलेंट का अवॉर्ड जीतकर दोहरी जीत हासिल की है।
#Boong टीम को बधाई।
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#DCSouthAsianFilmFestival"
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आपको बता दें कि अपने शानदार सफर को आगे बढ़ाते हुए, 'बूंग' ने ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर भी इतिहास रचा और BAFTA अवॉर्ड जीतने वाली पहली इंडियन फिल्म बन गई। यह जीत बेहद खास इसलिए भी थी क्योंकि इसने मणिपुरी सिनेमा को ग्लोबल पहचान दिलाई। यह उपलब्धि न केवल फ़िल्म मेकर्स के लिए, बल्कि इंडियन फ़िल्म इंडस्ट्री के लिए भी एक अहम पल था, जिसने देश के अलग-अलग हिस्सों से आ रही कहानियों की विविधता और समृद्धि को सामने रखा।
लक्ष्मीप्रिया देवी ने इस फिल्म को लिखा और डायरेक्ट किया है। फिल्म का पहला प्रीमियर टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ था, जिसके बाद यह सिलसिला आगे बढ़ता गया। इसके बाद फिल्म को वारसॉ इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, साओ पाउलो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, एडिलेड फिल्म फेस्टिवल और टालिन ब्लैक नाइट्स फिल्म फेस्टिवल समेत कई फेस्टिवल में अपना जादू बिखेरते हुए देखा गया। हर पड़ाव के साथ फिल्म की एक ऐसी संवेदनशील और भावनाओं में डूबी कहानी के रूप में पहचान मजबूत होती गई, जो अपनी सच्चाई से जुड़ी हुई है।
एक मणिपुरी कहानी 'बूंग', जिसमें गुगुन किपगेन ने एक युवा लड़के का किरदार निभाया है, वह दिल को छू जाती है। फिल्म में मौजूद युवा लड़का अपने बिखर चुके परिवार को फिर से एक साथ लाने की कोशिश करता है। बूंग को उसकी मां मंदाकिनी (बाला हिजाम निंगथौजम) ने अकेले पाला है। ऐसे में अपने परिवार को साथ लाने के लिए बूंग अपने सबसे अच्छे दोस्त के साथ अपने खो चुकते पिता को खोजने के लिए एक इमोशंस से भरे सफर पर निकल जाता है। फिल्म की यह कहानी दिल की गहरी से लिखी गई है जिसमें उम्मीद, हिम्मत और माँ-बच्चे के रिश्ते जैसे बेहद अहम मुद्दों पर रोशनी डाली गई है।













