TIL Desk लखीमपुर खीरी:👉 गोबिंद शुगर मिल, ऐरा (Zuari Industries Limited की इकाई) ने ‘बेटर केन, बेटर रिटर्न्स’ विषय पर राउंडटेबल 3.0 का आयोजन किया। इसमें करीब 250 किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, सरकारी प्रतिनिधियों, गन्ना समितियों और उद्योग विशेषज्ञों ने भाग लिया। चर्चा का मुख्य उद्देश्य गन्ने की उपयुक्त किस्मों के चयन के जरिए उत्पादकता बढ़ाना, किसानों की आय में सुधार करना और उद्योग को बेहतर गुणवत्ता वाला गन्ना उपलब्ध कराना रहा।

जु़आरी इंडस्ट्रीज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अथर शाहाब ने कहा कि किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ाने के लिए मिट्टी, पानी की उपलब्धता और स्थानीय मौसम के अनुकूल गन्ने की किस्मों का चयन जरूरी है। उन्होंने बदलते मौसम और अत्यधिक बारिश की चुनौतियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक खेती, बेहतर सिंचाई प्रबंधन और डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया। वहीं, गोबिंद शुगर मिल के कार्यकारी निदेशक एवं यूनिट हेड आलोक सक्सेना ने कहा कि किसानों को बेहतर किस्मों के चयन, उन्नत कृषि पद्धतियों, समय पर गन्ना खरीद और भुगतान के माध्यम से सहयोग देना मिल की प्राथमिकता है।

जिला गन्ना अधिकारी जितेंद्र कुमार मिश्रा ने स्थानीय मिट्टी और मौसम के अनुकूल किस्मों के चयन तथा जल निकासी व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम में वैज्ञानिकों और उद्योग विशेषज्ञों ने गन्ने की किस्मों की उत्पादकता, रोग प्रतिरोधक क्षमता, चीनी रिकवरी और स्थानीय परिस्थितियों में उनके प्रदर्शन पर विचार साझा किए।

किसान संवाद के दौरान उत्पादकों ने गन्ने की मौजूदा और नई किस्मों से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। चर्चा में फसल की पैदावार, पेड़ी की उत्पादकता, रोगों से बचाव, बीज की उपलब्धता और नई किस्मों को अपनाने में किसानों के सामने आने वाली चुनौतियां प्रमुख रहीं। कार्यक्रम में डिजिटल पहल, किसान प्रशिक्षण और खेतों में प्रदर्शन के माध्यम से वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई।

कार्यक्रम के अंत में तराई क्षेत्र के लिए संतुलित गन्ना किस्म योजना विकसित करने पर जोर दिया गया। इसके तहत एक-दो किस्मों पर निर्भरता कम करने, गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता बढ़ाने, खेतों में प्रदर्शन आयोजित करने और किसानों, वैज्ञानिकों तथा गन्ना विभाग के बीच समन्वय मजबूत करने पर सहमति बनी, ताकि गन्ने की उत्पादकता और किसानों के आर्थिक लाभ में सुधार किया जा सके।