TIL Desk न्यूयॉर्क:👉भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंधों में पिछले कुछ वर्षों के मुकाबले सुधार देखने को मिला है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दोनों देशों के संबंधों को लेकर यह बात कही है। उन्होंने संकेत दिया कि पहले की तुलना में मौजूदा समय में भारत और चीन के बीच स्थिति बेहतर हुई है। हालांकि, दोनों देशों के बीच सीमा विवाद और अन्य मुद्दे अब भी महत्वपूर्ण बने हुए हैं। ऐसे में संबंधों में आए सुधार को क्षेत्रीय स्थिरता और कूटनीतिक बातचीत के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

विदेश मंत्री जयशंकर ने भारत और चीन के मौजूदा रिश्तों की तुलना कुछ वर्ष पहले की स्थिति से करते हुए कहा कि अब दोनों देशों के संबंध पहले से बेहतर हैं। भारत और चीन के बीच पिछले कुछ वर्षों में सीमा पर तनाव की स्थिति बनी रही थी। विशेष रूप से पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर हुए घटनाक्रम के बाद दोनों देशों के रिश्तों में काफी तल्खी आ गई थी। इसके बाद से ही दोनों देश सीमा से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए विभिन्न स्तरों पर बातचीत करते रहे हैं।

भारत और चीन के संबंधों में सीमा विवाद सबसे प्रमुख मुद्दों में से एक रहा है। दोनों देशों के बीच सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिशा में सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर कई दौर की बातचीत भी हुई है।

जयशंकर के बयान से यह भी स्पष्ट होता है कि भारत चीन के साथ अपने संबंधों को लेकर व्यावहारिक दृष्टिकोण अपना रहा है। भारत की ओर से लगातार यह रुख रहा है कि सीमा पर शांति और स्थिरता के बिना दोनों देशों के बीच सामान्य संबंध स्थापित करना मुश्किल है। वहीं, व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय सहयोग जैसे विषय भी द्विपक्षीय रिश्तों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

भारत और चीन दोनों ही एशिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं हैं। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी दोनों देशों की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में उनके बीच बेहतर संबंधों का प्रभाव केवल द्विपक्षीय सहयोग तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर व्यापक क्षेत्रीय और वैश्विक परिस्थितियों पर भी पड़ सकता है।

विदेश मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत और चीन के रिश्तों का भविष्य काफी हद तक सीमा की स्थिति पर निर्भर करेगा। उनके अनुसार, सीमा पर सामान्य स्थिति बहाल होने के साथ ही द्विपक्षीय संबंधों को भी सामान्य बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। हालांकि, मौजूदा सुधार का अर्थ यह नहीं है कि दोनों देशों के बीच सभी मतभेद समाप्त हो गए हैं।

इस प्रकार, जयशंकर की टिप्पणी भारत और चीन के बीच सुधरते राजनयिक संपर्कों के साथ-साथ सीमा पर शांति और स्थिरता के महत्व को भी रेखांकित करती है।