TIL Desk नई दिल्ली:👉वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक उतार-चढ़ाव के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया के सामने भारत की मजबूत विकास नीति को स्पष्ट किया है। 'ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम' को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने मंगलवार को कहा कि भारत किसी दूसरे देश को नुकसान पहुंचाकर या किसी की कीमत पर आगे नहीं बढ़ता, बल्कि वह 'दुनिया के साथ और दुनिया के लिए' विकास करने की नीति पर चलता है। उन्होंने भारत को संकट के समय एक बेहद विश्वसनीय और स्थिर वैश्विक आर्थिक साझेदार के रूप में प्रस्तुत किया।

प्रधानमंत्री ने देश की मजबूत व्यापक आर्थिक स्थिति (Macroeconomic Fundamentals) के आंकड़े साझा करते हुए बताया कि अप्रैल-जून तिमाही में भारत ने 7.8 प्रतिशत की शानदार आर्थिक विकास दर (GDP Growth) दर्ज की है। इसके साथ ही देश का विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर के पार पहुंच चुका है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की वित्तीय सुदृढ़ता को दर्शाता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पिछले 12-13 वर्षों में देश का चालू खाते का घाटा (Current Account Deficit) 4% से घटकर महज 0.5% के स्तर पर आ गया है, जो एक बड़ी आर्थिक उपलब्धि है।

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने 'पावर टू एम्पावर' (सशक्त करने की शक्ति) के सिद्धांत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वास्तविक आर्थिक और तकनीकी ताकत वह है जो मानव जीवन को बेहतर बनाए और दूसरों के लिए अवसरों के नए द्वार खोले। उन्होंने वैश्विक समुदाय को चेतावनी दी कि आज के दौर में आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chains), ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, भुगतान प्रणालियां और आधुनिक तकनीक तेजी से भू-राजनीतिक दबाव और प्रभुत्व जमाने के हथियार बनते जा रहे हैं। ऐसे में वैश्वीकरण के पुराने रास्ते अब रुकावटें (Chokepoints) बन रहे हैं, जिससे निपटने के लिए आपसी विश्वास की सख्त जरूरत है।

भारत की प्रतिबद्धता दोहराते हुए उन्होंने कहा कि देश कराधान, दिवाला (Insolvency) और श्रम कानूनों से जुड़े सुधारों को किसी मजबूरी में नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक संकल्प के तहत लागू कर रहा है। उन्होंने देश के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) और कोविड काल के 'कोविन' (CoWIN) जैसे ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म्स का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत अपनी डिजिटल विशेषज्ञता, विशेषकर ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) के साथ साझा करने के लिए हमेशा तत्पर है। इसके अलावा, उन्होंने भारत में 2.5 लाख से अधिक स्टार्टअप्स के विशाल नेटवर्क और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का जिक्र करते हुए वैश्विक निवेशकों को भारत के समावेशी विकास का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया।