TIL Desk संयुक्त राष्ट्र: भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के मंच से पड़ोसी देश पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए साफ किया है कि परमाणु हथियारों को 'शासन चलाने का सामान्य साधन' नहीं माना जाना चाहिए | संयुक्त राष्ट्र महासभा की प्रथम समिति (निरस्त्रीकरण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा) की बैठक में बोलते हुए भारतीय प्रतिनिधि प्रतीक बेदी ने स्पष्ट किया कि भारत किसी भी तरह के परमाणु ब्लैकमेल या दबाव के आगे कभी नहीं झुकेगा |

भारतीय राजनयिक ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना उसकी परमाणु धमकियों पर तीखा प्रहार किया | उन्होंने कहा कि गैर-पारंपरिक युद्ध या आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए परमाणु हथियारों की आड़ लेना बेहद खतरनाक है | ऐसे कदम क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने के बजाय तनाव बढ़ाने का जोखिम पैदा करते हैं | भारत ने पाकिस्तान में जवाबदेही की कमी पर भी निशाना साधा. बेदी ने कहा कि जहां सत्ता में बैठे लोग न तो जनता द्वारा चुने जाते हैं और न ही उनके प्रति जवाबदेह होते हैं, वहां उनके फैसले देश के लिए कोई जोखिम नहीं उठाते | यही कारण है कि वहां संकट को ही सत्ता का साधन और अस्थिरता को फायदे का जरिया बना लिया जाता है |

भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी रक्षात्मक नीतियों को भी पूरी स्पष्टता के साथ दोहराया. भारतीय प्रतिनिधि ने साफ कहा कि भारत की सैन्य क्षमताएं पूरी तरह रक्षात्मक हैं और वे देश की सुरक्षा जरूरतों के माहौल के हिसाब से तय होती हैं, न कि किसी विशेष देश को निशाना बनाने के लिए |

तनाव बढ़ने को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताओं को जायज ठहराते हुए भारत ने कहा कि किसी देश की मंशा का सही आकलन समय के साथ उसके आचरण से ही किया जा सकता है | भारत हमेशा से 'नो-फर्स्ट-यूज' (पहले इस्तेमाल न करने) की अपनी जिम्मेदार परमाणु नीति और न्यूनतम विश्वसनीय प्रतिरोध के सिद्धांत पर अडिग रहा है | इस कड़े बयान से भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह संदेश दे दिया है कि वह अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह सक्षम है और किसी भी अप्रत्याशित खतरे का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है |