TIL Desk वाशिंगटन/नई दिल्ली:👉 अमेरिका के आधिकारिक निवास व्हाइट हाउस ने भारत को संयुक्त राज्य अमेरिका के सबसे मजबूत और भरोसेमंद वैश्विक सहयोगियों में से एक करार दिया है। इसके साथ ही, अमेरिकी प्रशासन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच के प्रगाढ़ व्यक्तिगत संबंधों की भी खुलकर तारीफ की है। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एना केली ने एक विशेष बयान में कहा कि दोनों शीर्ष नेताओं के बीच की बेहतरीन केमिस्ट्री और आपसी तालमेल ने भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों को एक ऐतिहासिक मजबूती देने का काम किया है।

पीएम मोदी के 25 साल पूरे होने पर मिला खास सम्मान:-

व्हाइट हाउस का यह बेहद महत्वपूर्ण बयान ऐसे समय में आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक जनसेवा के क्षेत्र में देश और राज्य के प्रमुख (हेड ऑफ गवर्नमेंट) के तौर पर अपने 25 वर्ष (एक चौथाई सदी) का लंबा कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा किया है। पीएम मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभाली थी और तब से लेकर अब तक लगातार देश की सेवा में जुटे हुए हैं। इस ऐतिहासिक पड़ाव पर दुनिया भर के नेताओं ने उन्हें बधाई दी, और इसी कड़ी में अमेरिकी प्रशासन ने भी दोनों देशों की अटूट रणनीतिक साझेदारी को रेखांकित किया।

बिना रक्षा संधि के भी सबसे मजबूत रणनीतिक रिश्ते:-

गौरतलब है कि भारत और अमेरिका के बीच कोई औपचारिक 'पारस्परिक रक्षा संधि' (Mutual Defence Treaty) नहीं है, इसके बावजूद दोनों देशों ने रक्षा, उच्च तकनीक (क्रिटिकल टेक्नोलॉजी), व्यापार और रणनीतिक मोर्चों पर व्यापक और गहरा सहयोग स्थापित कर लिया है। व्हाइट हाउस के बयान के अनुसार, व्यापार और नीतिगत मुद्दों पर समय-समय पर आने वाले छोटे-मोटे मतभेदों के बावजूद, दोनों देश हमेशा बातचीत के जरिए एक बेहतर रास्ता निकालने में कामयाब रहे हैं। हाल ही के दिनों में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) और ग्लोबल साउथ में भारत की बढ़ती भूमिका ने इस रिश्ते को और ज्यादा जरूरी बना दिया है।

दुनिया की दो बड़ी लोकतांत्रिक ताकतों का बढ़ता प्रभाव:-

डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और आर्थिक सरगर्मियां काफी तेज हुई हैं। हाल ही में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौतों को अंतिम रूप देने और टैरिफ कम करने को लेकर भी लगातार बैठकें हुई हैं। वैश्विक मंच पर चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने और आतंकवाद के खिलाफ जंग में दोनों देशों का एक साथ खड़े होना यह साफ दर्शाता है कि आने वाले समय में यह 'ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' नए आयाम छूने वाली है।