TIL Desk Tehran :👉 ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने क्षेत्रीय तनाव और संभावित सैन्य संघर्ष को लेकर कड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि यदि मौजूदा परिस्थितियां विनाशकारी युद्ध में तब्दील हो जाती हैं, तब भी ईरान आक्रामकता के खिलाफ अपना रुख बनाए रखेगा। अराघची के इस बयान से पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान के रुख को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है।
अराघची ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि ईरान किसी भी तरह की आक्रामक कार्रवाई के सामने झुकने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने कहा कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हो जाएं, उनका देश अपने रुख पर कायम रहेगा। ईरानी विदेश मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब क्षेत्र में तनाव और सैन्य टकराव की आशंकाओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएं बनी हुई हैं।
ईरान लंबे समय से अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों से जुड़े मुद्दों पर सख्त रुख अपनाता रहा है। अराघची के ताजा बयान को भी इसी नीति के संदर्भ में देखा जा रहा है। उनका कहना है कि किसी भी तरह की आक्रामकता के खिलाफ ईरान अपनी स्थिति स्पष्ट रखेगा। हालांकि, इस बयान में संभावित संघर्ष की स्थिति को लेकर ईरान की प्रतिक्रिया का विस्तृत सैन्य खाका सामने नहीं आया है।
इसी बीच, ईरान ने कूटनीतिक बातचीत के विकल्प को पूरी तरह बंद नहीं किया है। अराघची ने कहा है कि उनका देश शांति की संभावनाओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहता और बातचीत के जरिए समाधान निकालने के प्रयास जारी रखेगा। उन्होंने अमेरिका के साथ वार्ता की संभावनाओं पर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की है।
ईरानी विदेश मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने से जुड़े ईरान के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। इस घटनाक्रम के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक प्रयासों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
अराघची ने यह भी स्पष्ट किया है कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देगा और किसी भी नए सैन्य हमले की स्थिति में उसका सामना करने के लिए तैयार है। हालांकि, उन्होंने शांति के लिए बातचीत की संभावनाओं को भी खुला रखा है। ऐसे में आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक गतिविधियां क्षेत्रीय हालात की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।













