TIL Desk लखनऊ:👉साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था नवसृजन के तत्वावधान में आज अपराह्न उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के निराला सभागार में साहित्यिक दंपति त्रिवेणी प्रसाद दूबे एवं रमा दूबे की चार पुस्तकों के लोकार्पण समारोह का आयोजन किया गया।
समारोह में मुख्य अतिथि डॉ. सुल्तान शाकिर हाशमी (पूर्व-सलाहकार सदस्य, योजना आयोग, भारत सरकार), एवं वरेण्य अतिथि प्रो. (डॉ.) हरि शंकर मिश्र तथा गोपाल कृष्ण शर्मा 'मृदुल', मुख्य वक्ता सत्यदेव प्रसाद द्विवेदी 'पथिक', मंजू सक्सेना, डॉ. सुधा मिश्रा, डॉ. शिव मंगल सिंह एवं महेश चन्द्र द्विवेदी (पूर्व पुलिस महानिदेशक उ.प्र.) ने त्रिवेणी प्रसाद दूबे द्वारा लिखित "मन मेरा यायावर जैसा' (गीत संग्रह), "सरल सत्य की अद्भुत सुषमा' (यात्रा वृत्तांत संग्रह), "दिल सूफियाना हो गया" (ग़ज़ल संग्रह), एवं रमा दुबे द्वारा लिखित "रैना बीते ना" (संस्मरणात्मक उपन्यास) का लोकार्पण किया।
इस अवसर पर मुख्य वक्ता डॉ. शिव मंगल सिंह 'मंगल' ने "मन मेरा यायावर जैसा" (गीत संग्रह), डॉ. सत्यदेव प्रसाद द्विवेदी 'पथिक' ने "सरल सत्य की अद्भुत सुषमा" (यात्रा वृत्तांत संग्रह), मंजू सक्सेना ने "दिल सूफियाना हो गया" (ग़ज़ल संग्रह), एवं डॉ. सुधा मिश्रा "रैना बीते ना" (संस्मरणात्मक उपन्यास) पर अपने समीक्षात्मक उद्गार प्रस्तुत किए। समारोह में त्रिवेणी प्रसाद दूबे ने अंपनी लोकार्पित कृतियों से अपनी कुछ रचनाओं का वाचन किया।
समारोह में नवसृजन संस्था की ओर से अनेक साहित्यकारों को प्रतीक चिह्न, अंगवस्त्र व प्रशस्ति पत्र भेंट कर वग्देवी साहित्य सम्मान से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर देवेश द्विवेदी 'देवेश', श्वेता शुक्ला, मनु वाजपेयी सहित तमाम साहित्य सुधि श्रोता उपस्थित थे। वाणी वंदना कुमार तरल और मंच संचालन डॉ. योगेश ने किया।












