* भारतीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्मों, एआई-सहायित फिल्म निर्माण व एनीमेशन का अनूठा संगम; ‘आओ फिल्म बनाएं’ अवॉर्ड्स में प्रतिभाओं को मिला सम्मान
TIL Desk लखनऊ:👉नवाबों की नगरी लखनऊ में शुक्रवार को सिनेमा, तकनीक, कल्पनाशीलता और नवाचार का अनूठा संगम देखने को मिला। एसआरएस सिनेमा, गोमती नगर में लखनऊ फिल्म फेस्टिवल सीज़न 4 और ‘इमैजिनेरियम 2026’ का भव्य शुभारंभ हुआ। 23 और 24 अक्टूबर को आयोजित यह दो दिवसीय महोत्सव फिल्म प्रदर्शन से आगे बढ़कर भारतीय एवं अंतरराष्ट्रीय सिनेमा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), एनीमेशन, गेमिंग और नई रचनात्मक तकनीकों को एक साझा मंच प्रदान कर रहा है। इसका उद्देश्य स्थापित फिल्मकारों के अनुभवों को नई पीढ़ी की प्रतिभाओं से जोड़ना, युवाओं को रचनात्मक अवसर उपलब्ध कराना और लखनऊ को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय फिल्म जगत में नई पहचान दिलाना है।
उद्घाटन समारोह में उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पूर्व सांसद डॉ. रीता बहुगुणा जोशी सहित कई प्रतिष्ठित हस्तियां उपस्थित रहीं। फिल्मकार एवं जूरी सदस्य ज्योति कपूर दास, कोकोरो की संस्थापक वंदना सहगल और लेखिका सुनीता अरोन ने भी समारोह में भाग लिया। आयोजन से जुड़े प्रतिनिधियों में लखनऊ फिल्म फोरम की संस्थापक एवं अमरेन फाउंडेशन की संस्थापक अध्यक्ष रेणुका टंडन, अम्ब्रिश टंडन, विभा और संगीता बनर्जी सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे। अतिथियों का स्वागत किया गया और उन्हें स्मृति-चिह्न भेंट किए गए।
महोत्सव के उद्घाटन की विशेषता रही पारंपरिक दीप प्रज्वलन के स्थान पर पौधे को जल अर्पित करने की अनूठी पहल। इस प्रतीकात्मक शुरुआत ने पर्यावरण संरक्षण, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और नए विचारों को पोषित करने का संदेश दिया। आयोजन की यह पहल रचनात्मकता को सामाजिक जिम्मेदारी और सतत विकास से जोड़ने का भी प्रतीक बनी।
लखनऊ फिल्म फोरम की संस्थापक एवं अमरेन फाउंडेशन की संस्थापक अध्यक्ष रेणुका टंडन ने कहा कि महोत्सव का उद्देश्य ऐसा मंच तैयार करना है, जहां स्थापित फिल्मकारों और उभरती प्रतिभाओं को एक-दूसरे से सीखने, संवाद करने और अपनी कहानियां दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिले। उन्होंने विश्वास जताया कि सिनेमा, एनीमेशन और उभरती तकनीकों के माध्यम से लखनऊ एक सशक्त रचनात्मक केंद्र के रूप में अपनी पहचान और मजबूत कर सकता है।
लखनऊ फिल्म फेस्टिवल में चयनित भारतीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्मों की विविधतापूर्ण प्रस्तुतियां दर्शकों के सामने रखी जा रही हैं। भारतीय सिनेमा के सत्र में ‘थ्री ऑफ अस’ और ‘अ लेगेसी रिमेम्बर्ड’ जैसी फिल्मों के साथ फिल्मकार मंटा जोगी से जुड़ी प्रस्तुति भी कार्यक्रम का हिस्सा बनी।
भारतीय परिप्रेक्ष्य पर आधारित लघु फिल्मों, डॉक्यूमेंट्री और रचनात्मक प्रस्तुतियों में ‘चाय’, ‘वनाबा’, ‘वीविंग होप’, ‘मूविंग फोटो’, ‘ऐना’, ‘श्री’, ‘जन शिक्षण संस्थान’ और ‘मर्डर एट मंकी हिल’ शामिल हैं। इन फिल्मों के माध्यम से विविध विषयों, सामाजिक सरोकारों और कहानी कहने की अलग-अलग शैलियों को सामने लाया जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय फिल्म सत्र में स्पेन, पाकिस्तान, पोलैंड, ऑस्ट्रेलिया, इटली और फ्रांस सहित विभिन्न देशों की फिल्में प्रदर्शित की जा रही हैं। इनमें स्पेन की ‘ऑल फ्रेस्को’, पाकिस्तान की ‘द शैडोज लेफ्ट बिहाइंड’, पोलैंड की ‘मटका (मदर)’, ऑस्ट्रेलिया की ‘स्लो डेटिंग’, ‘डियर टिलो’, इटली की ‘एल'एक्वारियो (द एक्वेरियम)’ और फ्रांस की ‘ब्लांशेट एंड द एट सेंट्स’ शामिल हैं। ‘कार्टापेस्टा’ का ट्रेलर भी कार्यक्रम में शामिल है। ‘एल'एक्वारियो’ की अवधि 14 मिनट बताई गई है।
फिल्मों के बीच 30 सेकंड के परिचय ऑडियो और उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की विज्ञापन फिल्म का प्रदर्शन किया गया है। इस तरह महोत्सव विभिन्न देशों की सिनेमाई अभिव्यक्तियों और सांस्कृतिक दृष्टिकोणों को एक मंच पर लाने का प्रयास कर रहा है।
महोत्सव का प्रमुख आकर्षण ‘इमैजिनेरियम 2026’ है, जिसमें फिल्म निर्माण की बदलती तकनीकों और रचनात्मक उद्योगों के भविष्य पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत एआई-सहायित फिल्म निर्माण, एनीमेशन, गेमिंग और अन्य रचनात्मक तकनीकों पर केंद्रित सत्र, मास्टरक्लास और पैनल चर्चाएं आयोजित की जा रही हैं।
‘रिटर्न ऑफ द जंगल’ के निर्माण पर विशेष मास्टरक्लास और पोलैंड की एनीमेशन फिल्मों का संकलन कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में शामिल हैं। इन सत्रों का उद्देश्य प्रतिभागियों को नए तकनीकी प्रयोगों, फिल्म निर्माण की प्रक्रियाओं और बदलते रचनात्मक परिदृश्य से परिचित कराना है।
महोत्सव के विशेष खंड ‘द फाइनल फ्रेम’ में फिल्मकार ज्योति कपूर दास की फिल्म ‘अनट्रैप्ड’ का प्रदर्शन निर्धारित किया गया। इसके साथ आयोजित विशेष संवाद में ज्योति कपूर दास, सहाना राव और मार्क एस. बेनिंगटन शामिल हुए। फिल्म प्रदर्शन के साथ संवाद की यह पहल दर्शकों को फिल्म निर्माण, रचनात्मक दृष्टिकोण और कहानियों के पीछे की प्रक्रिया को समझने का अवसर प्रदान करती है।
फिल्म फेस्टिवल के अंतर्गत आयोजित ‘आओ फिल्म बनाएं’ अवॉर्ड्स समारोह में विभिन्न श्रेणियों के विजेताओं को सम्मानित किया गया। इसके साथ जूरी सदस्यों को भी सम्मान प्रदान किया गया। पुरस्कारों के माध्यम से फिल्म निर्माण के अलग-अलग क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कलाकारों और तकनीकी प्रतिभाओं को पहचान मिली।
जूरी में
ज्योति कपूर दास — फिल्मकार,
राजेश भाटिया — ओएफएएल के सह-संस्थापक, फिल्मकार ,तहज़ीब खुराना — एनिमेटर, शिक्षा प्रचारक , रोचना कुमार — फिल्म प्रोग्रामर एवं फिल्मकार,भरत अरोरा — ओएफएएल के सह-संस्थापक, सहाना राव — फिल्मकार एवं निर्माता प्रमुख रूप से
शामिल रहे ।
प्रमुख पुरस्कार विजेता इस प्रकार रहे:
पुरस्कार एवं नकद राशि
* सर्वश्रेष्ठ महिला निर्देशक तृप्ति भोईर : ₹25,000 + ट्रॉफी
* सर्वश्रेष्ठ शॉर्ट फिल्म - चाय (लघु फिल्म): ₹25,000 + ट्रॉफी
* सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री (वृत्तचित्र):जन शिक्षण संस्थान ₹30,000 + ट्रॉफी
* सर्वश्रेष्ठ एनिमेशन फिल्म: अंटिल कैन फ्लाई ₹25,000 + ट्रॉफी
* सर्वश्रेष्ठ एआई-सहायता प्राप्त फिल्म:स्प्रिंग इन ए बोटल ₹15,000 + ट्रॉफी
* सर्वश्रेष्ठ छात्र फिल्म: ‘श्री’, ₹15,000 + ट्रॉफी
इसके अलावा
सर्वश्रेष्ठ साउंड डिजाइन: दीप बाव — ‘कील’, सर्वश्रेष्ठ एडिटिंग: अनादि अथले — ‘वीविंग होप’,
सर्वश्रेष्ठ सिनेमैटोग्राफी:विशाल वर्मा — मंटा जोगी की फिल्म सर्वश्रेष्ठ पटकथा: जगदीश तिवारी — ‘ऐना’,
सर्वश्रेष्ठ निर्देशन: प्रज्वल एचजी — ‘वनाबा’,
सर्वश्रेष्ठ महिला हकलाकार: अनुराधा सुमित सालुंखे — ‘अनाघा’,
सर्वश्रेष्ठ पुरुष कलाकार: भरत राज — ‘वनाबा’,
लघु फिल्म श्रेणी में प्रथम पुरस्कार ‘द ब्रिज’,को ट्रॉफियां प्रदान की गई।
इन पुरस्कारों ने फिल्म निर्माण के विभिन्न पक्षों में उत्कृष्टता को रेखांकित करते हुए स्वतंत्र सिनेमा और नई प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की महोत्सव की प्रतिबद्धता को मजबूत किया। महोत्सव के पहले दिन विशेष फिल्म ‘किलिंग अ ट्रेटर’ का प्रदर्शन भी किया गया। दिनभर फिल्मों, चर्चाओं और रचनात्मक गतिविधियों से सजे कार्यक्रम का समापन भजन संध्या के साथ हुआ। संगीत और आध्यात्मिक वातावरण ने आयोजन को एक भावपूर्ण विराम दिया।
लखनऊ फिल्म फेस्टिवल सीज़न 4 और ‘इमैजिनेरियम 2026’ को प्रस्तुतकर्ता के रूप में उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग का सहयोग प्राप्त है। बीबीडी एआई हैकाथॉन का प्रायोजक है, जबकि एलएमएचए ने लखनऊ फिल्म फोरम की फिल्म कैलेंडर पहल में महत्वपूर्ण सहयोग दिया है। आयोजकों ने सभी सहयोगी संस्थानों और समर्थकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
महोत्सव को सफल बनाने में आयोजन टीम के सदस्यों विभा अग्रवाल, अम्बरीष टंडन,नमिता गुप्ता, रचना टंडन, रोचना कुमार, उषा विश्वकर्मा, विभु कौशिक, पार्थ, देव वर्मा, लक्ष्मी, अनुपमा, अनु यादव, दीपक विश्वकर्मा, ऋषिका शर्मा, शिराली तिवारी, शालिनी सिंह, लक्ष्य मिश्रा, शायान अख्तर और त्रादिकी मिश्रा का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
लखनऊ फिल्म फोरम और अमरेन फाउंडेशन की यह पहल शहर के फिल्म एवं मीडिया परिवेश को नई दिशा देने के साथ युवाओं को अपनी रचनात्मक क्षमता प्रदर्शित करने के अवसर उपलब्ध करा रही है। भारतीय और अंतरराष्ट्रीय सिनेमा, नई तकनीकों, एनीमेशन, गेमिंग और रचनात्मक संवाद को एक साथ लाकर यह महोत्सव लखनऊ की सांस्कृतिक पहचान को व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
फिल्म फेस्टिवल सीज़न 4 और ‘इमैजिनेरियम 2026’ का मूल संदेश स्पष्ट है—सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि विचारों, संस्कृतियों, तकनीक और समाज को जोड़ने वाली सशक्त अभिव्यक्ति है। रेणुका टंडन के नेतृत्व में आयोजित यह महोत्सव लखनऊ की रचनात्मक ऊर्जा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।












