TIL Desk लखनऊ:
उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक(डीजीपी) राजीव कृष्णा ने कहा है कि प्रदेश में तेजी से बढ़ते ट्रैफिक जाम की समस्या से निपटने के लिए यातायात निदेशालय द्वारा सी-आरटीसी (सिटी रेड्यूसिंग ट्रैफिक कंजेक्शन) योजना लागू की गई है। प्रेस कांफ्रेंस में डीजीपी ने कहा कि -मुख्यमंत्री, उ0प्र0 योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व, जन कल्याणकारी दृष्टिकोण के अनुरूप प्रदेश के नागरिको को सुगम, निर्बाध एवं सुव्यवस्थित यातायात का अनुभाव प्रदान करना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में सम्मिलित है। मा0 मुख्यमंत्री, जी के स्पष्ट निर्देश है कि प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में यातायात की बाधाओं को दूर कर आम जनमानस की दैनिक आवाजाही को सरल एवं समयबद्ध बनाया जाय। इसी संकल्प को मूर्त रूप देते हुये यातायात निदेशालय, उ0प्र0 द्वारा प्रदेश के 20 जनपदों में पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में सुगम यातायात योजना लागू की जा रही है, जिसे C-RTC (City-Reducing Traffic Congestion) Scheme नाम दिया गया है।
प्रदेश के महानगर एवं अन्य प्रमुख नगरों में यातायात की दृष्टि से जाम की समस्या प्रमुख है। प्रदेश में नगरीय क्षेत्रों में हो रहे विकास एवं विस्तार के कारण शहरीकरण की गति तीव्र हुई है, जिसके परिणामस्वरुप नगरीय क्षेत्र में जनसंख्या एवं वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जिसके कारण सड़कां पर यातायात का दबाव बढ़ता जा रहा है। नगरीय क्षेत्रों में यातायात जाम एक गम्भीर चुनौती है जाम के कारण जहॉ एक ओर ईधन की अधिक खपत होती है वहीं दूसरी ओर वाहनों से हो रहे उत्सर्जन के कारण वायु प्रदूषण बढ़ता है, जिसके कारण आम जनता की स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्यायें बढ़ी हैं। जाम के कारण आकस्मिक सेवायें यथा एम्बुलेन्स, फायर टेण्डर आदि के फंसने के कारण जनहानि होने की संभावना रहती है।
जनमानस को जाम मुक्त एवं सुगम यात्रा का अनुभव प्रदान करना यातायात पुलिस का प्रमुख दायित्व है। इस उद््देश्य की प्राप्ति के लिये इस योजना के प्रथम चरण में प्रदेश के समस्त कमिश्नरेट एवं प्रत्येक परिक्षेत्र से एक प्रमुख जनपद में जाम से सर्वाधिक प्रभावित मार्गो को चिन्हित कर इसे जाम मुक्त कराया जाना है। मुख्यालय स्तर पर इस समस्या के निदान के लिये एक तकनीक आधारित कार्ययोजना तैयार की गयी है। इस योजना को प्रथम चरण में समस्त 07 कमिश्नरेट व विभिन्न परिक्षेत्र के कुल 13 जनपदों में लागू किया जा रहा है। इन 20 इकाईयों के चिन्हित मार्गो का संख्यात्मक विवरण निम्नवत् है-
क्र0सं0 कमिश्नरेट/जनपद का नाम मार्गो की संख्या
1. आगरा 08
2. आजमगढ़ 09
3. अलीगढ़ 06
4. अयोध्या 10
5. बॉदा 06
6. बरेली 06
7. गौतमबुद्धनगर 12
8. गाजियाबाद 08
9. गोरखपुर 10
10. गोण्डा 04
11. झॉसी 06
12. कानपुर 14
13. लखनऊ 12
14. मथुरा 10
15. मेरठ 10
16. मिर्जापुर 08
17. मुरादाबाद 08
18. प्रयागराज 10
19. सहारनपुर 05
20. वाराणसी 10
कुल मार्गो की संख्या: 172
सामान्यतः शहरां में प्रमुख मार्गों पर यातायात का दबाव अलग-अलग समय पर कम या ज्यादा होता रहता है यथा पीक आवर्स ¼Peak Hours) में किसी प्रारम्भ बिन्दु से अंतिम बिन्दु तक के यात्रा का समय (¼Travel Time) सामान्य से काफी अधिक होता है। चिन्हित मार्गों (Identified Routes) पर Scientific Study से पृथक-पृथक कालखण्डों में यात्रा में लगने वाले समय (Travel Time) में काफी अन्तर पाया गया है।
C-RTC कार्यक्रम की प्रमुख संकल्पना चिन्हित मार्गां (Identified Routes) पर पीक आवर्स में शुरुआत के बिन्दु व अंतिम बिन्दु के बीच यात्रा के समय (Travel Time) को कम करना है। यात्रा के प्रवाह (Flow of Traffic) को निर्बाध एवं सुचारू रखने हेतु मार्गां को अवरोध मुक्त (Obstacle free) रखना है।
उक्त लक्ष्य के प्राप्ति हेतु Route Specific Targeted Intervention की आवश्यकता है तथा इन routes पर सुगम यातायात संचालन के लिये एक मार्ग प्रभारी बनाये जाने की आवश्यकता पायी गयी है, जिसे रूट मार्शल कहा जायेगा। रूट मार्शल (Route Marshal) इस योजना को धरातल पर लागू किये जाने के लिये पूर्णतया जिम्मेदार होगा। रूट मार्शल (Route Marshal) जनपद में उपलब्ध यातायात निरीक्षक/उप निरीक्षक में सबसे योग्य एवं दक्ष कर्मियों में से होगा। मार्ग प्रभारी की नियुक्ति राजपत्रित नोडल अधिकारी, यातायात के प्रस्ताव पर जनपद पुलिस प्रमुख द्वारा की जायेगी। जनपद में निरीक्षक/उप निरीक्षक, यातायात की उपलब्धता के आधार पर रूट मार्शल को यथासम्भव आस-पास के एक से अधिक मार्ग का प्रभारी बनाया जा सकता है। रूट मार्शल से विशेष परिस्थितियों में यातायात से सम्बन्धित अन्य ड्यूटियॉ भी ली जा सकती है।
रूट मार्शल (Route Marshal) का लक्ष्य चिन्हित मार्ग (AOR- Area of Responsibility) पर पीक आवर्स (Peak Hours) में Travel Time को कम करना होगा। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिये जिस थाना क्षेत्र से उक्त चिन्हित मार्ग गुजर रहा है उसके सम्बन्धित थाना प्रभारी/थानाध्यक्ष की भी संयुक्त जिम्मेदारी होगी और वह अपना पूर्ण सहयोग मार्ग प्रभारी को प्रदान करेंगे।
जाम के निवारण हेतु उपाय (Suggestions):- C-RTC कार्यक्रम के अन्तर्गत चिन्हित मार्गो पर Congestion कम करने तथा पीक आवर में Travel Time कम करने हेतु कमिश्नरेट/जनपदों में ट्रैफिक विंग में नियुक्त वरिष्ठतम राजपत्रित अधिकारी नोडल अधिकारी होंगे।
यहाँ यह उल्लेखनीय है कि इस कार्ययोजना का प्रमुख उद्देश्य Peak Hours में Travel Time कम करना है। इसलिये Primary focus smooth traffic management पर होना चाहिये और इसको सुनिश्चित करने के लिये निम्नलिखित 5E के अन्तर्गत कार्यवाही की जानी चाहिये-
Education and Awareness (शिक्षा एवं जागरूकता)
Enforcement (प्रवर्तन)
Engineering and Technological Intervention (इंजीनियरिंग एवं तकनीकी हस्तक्षेप)
Encroachment Removal (अतिक्रमण हटाना)
E-rickshaw operation (ई-रिक्शा संचालन)
उक्त अवधारणा (कान्सेप्ट) को लागू करने की कोर स्टैटजी अत्याधुनिक AI आधारित तकनीक है, जो चिन्हित मार्गो पर लगने वाले Minimum Travel Time, Maximum Travel Time एवं Average Travel Time का विश्लेषण Graphical एवं Tabular Output के रूप में नोडल अधिकारी को देता है तथा रियल टाइम में उक्त चिन्हित मार्गो पर जाम के बिन्दुओं को मैप पर प्रदर्शित भी करता है। यह एक अत्याधुनिक प्रणाली है, जिसका उपयोग अत्यन्त सरल है और इसमें किसी प्रकार के कम्प्यूटर के ज्ञान की आवश्यकता नही है। नोडल अधिकारी अपने स्मार्ट फोन के माध्यम से किसी भी और कभी भी अपने Area Responsibility के चिन्हित मार्गो की वर्तमान स्थिति ज्ञात कर सकते है। इस प्रणाली के द्वारा Historical Data अर्थात 02 माह, 01 माह, विगत 03 सप्ताह, 02 सप्ताह तथा वर्तमान सप्ताह में और उस दिन का उस मार्ग पर लगने वाले Minimum Travel Time, Maximum Travel Time एवं Average Travel Time को देखा जा सकता है। नोडल अधिकारियों को अपने AOR- Area of Responsibility में प्रथम चरण में पीक आवर में Maximum Travel Time को 20 प्रतिशत कम करने का लक्ष्य दिया गया है।
’’एक रूट, एक रूट मार्शल’’ के सिद्धान्त पर इस योजना को जमीन पर लागू कराया जायेगा। चिन्हित 20 जनपदों में 172 रूट मार्शल की नियुक्ति के साथ-साथ उनके सहायतार्थ अन्य आवश्यक यातायात बल सम्बन्धित जनपद के नोडल अधिकारीयों द्वारा नियुक्त किया जायेगा। यातायात पुलिस के साथ-साथ उक्त रूट पर पड़ने वाले थानों के प्रभारी एवं फील्ड अधिकारी को भी इस योजना को लागू किये जाने की सयुक्त जिम्मेदारी दी जा रही है। चिन्हित मार्गो के परफर्मेन्स का लेखा-जोखा यातायात निदेशालय द्वारा रखा जायेगा तथा नियमित समय के अन्तराल पर इनका Performance Evaluate किया जायेगा।
इस प्रकार से प्रदेश के 20 जनपदों के शहरी क्षेत्र में 172 चिन्हित मार्गो पर यह योजना आज से प्रारम्भ की जा रही है। एक माह के बाद इस योजना का गहन अध्ययन और Performance का Review किया जायेगा।












