भोपाल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा असाक्षरों को साक्षर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, जिसका परिणाम है कि विश्व साक्षरता दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश में साक्षरता अभियान ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश में संचालित विभिन्न साक्षरता कार्यक्रमों से अब तक 1 करोड़ 63 लाख 4 हजार 132 शिक्षार्थी जुड़े हैं। इनमें से 1 करोड़ 38 लाख 90 हजार 550 शिक्षार्थियों ने सफलता हासिल की है। साक्षरता का यह अभियान अब केवल अक्षर ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों को समझने, शासकीय योजनाओं का लाभ लेने और आत्मनिर्भर बनने के लिए सक्षम बना रहा है।
संचालक राज्य शिक्षा केंद्र हरजिंदर सिंह ने बताया कि वर्ष 2011 की जनगणना में प्रदेश में करीब 1 करोड़ 89 लाख 65 हजार 583 असाक्षर व्यक्ति चिन्हित किए गए थे। निरंतर संचालित साक्षरता कार्यक्रमों के परिणामस्वरूप वर्तमान में यह संख्या घटकर लगभग 50 लाख 75 हजार 33 रह गई है। प्रदेश में साक्षरता को जन-अभियान का स्वरूप देते हुए विभिन्न चरणों में कार्यक्रम संचालित किए गए, जिनसे बड़ी संख्या में वयस्क शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़े हैं।
‘उल्लास’ नव भारत साक्षरता कार्यक्रम से साक्षरता अभियान को मिली नई गति
वर्तमान में प्रदेश में "उल्लास नव भारत साक्षरता" कार्यक्रम 2022-2027 संचालित किया जा रहा है। कार्यक्रम के तहत अब तक 99 लाख 68 हजार 100 शिक्षार्थियों को साक्षरता अभियान से जोड़ा गया है। इनमें से 84 लाख 46 हजार 498 शिक्षार्थियों ने सफलता प्राप्त की है।
उल्लास कार्यक्रम के जिला-वार परिणामों में भी कई जिलों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। झाबुआ में 1,96,967, विदिशा में 2,33,642 और नीमच में 1,55,561 शिक्षार्थियों ने सफलता हासिल की है। इसी प्रकार खरगोन में 3,09,948, उज्जैन में 3,75,618, धार में 2,69,673, रीवा में 2,55,188 और खंडवा में 2,51,462 शिक्षार्थियों ने सफलता प्राप्त की है।
झाबुआ, नीमच और विदिशा ने हासिल की 100 प्रतिशत उपलब्धि
शिक्षार्थियों को साक्षरता कार्यक्रम से जोड़कर झाबुआ, नीमच और विदिशा जिले ने अपने निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले 100 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की है। बुरहानपुर और खंडवा में 97 प्रतिशत, भिंड और निवाड़ी में 89 प्रतिशत, बालाघाट में 88 प्रतिशत एवं राजगढ़ में 87 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की गई है।
साक्षरता से आगे सशक्तिकरण का लक्ष्य
प्रदेश में संचालित विभिन्न साक्षरता कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल पढ़ना-लिखना सिखाना नहीं, बल्कि शिक्षार्थियों को दैनिक जीवन में पढ़ने, लिखने और गणना करने में सक्षम बनाने के साथ उनके अधिकारों, कर्तव्यों, शासकीय योजनाओं और उपलब्ध अवसरों के प्रति जागरूक करना भी है। साक्षरता के बढ़ते दायरे का असर लोगों के दैनिक जीवन में भी दिखाई दे रहा है। बैंकिंग व्यवस्था को समझने, शासकीय दस्तावेज पढ़ने, विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने में साक्षरता महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। प्रदेश में साक्षरता अभियान को सफल बनाने में शिक्षकों, स्वयंसेवकों, विद्यार्थियों, स्थानीय समुदाय, स्व-सहायता समूहों, प्रशासन और विभिन्न विभागों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। साक्षरता के क्षेत्र में हासिल की गई यह उपलब्धि केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि लाखों लोगों के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव की तस्वीर भी प्रस्तुत करती है।














