जालोर
लूनी-समदड़ी-भीलड़ी वाया जालोर रेलमार्ग के दोहरीकरण का काम अब गति पकड़ने लगा है। इस महत्वाकांक्षी रेल परियोजना का लाभ जालोर जिला मुख्यालय सहित जिले के अन्य 21 रेलवे स्टेशनों को भी मिलेगा। दोहरीकरण से रेलमार्ग की परिचालन क्षमता बढ़ने के साथ ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुगम होगी। उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल में बीते चार माह के दौरान परियोजना से जुड़े कई महत्वपूर्ण और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण कार्य पूरे किए गए हैं। इनमें चार रेलवे क्रॉसिंग पर गार्डर और आरसीसी बॉक्स लॉन्चिंग, तीन स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म के बीच सब-वे निर्माण तथा दो पुराने पुलों को नए आरसीसी बॉक्स से बदलने का काम शामिल है।

जोधपुर मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी के अनुसार दोहरीकरण परियोजना के तहत सतलाना, दूदिया और दुंदाड़ा स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म के बीच सब-वे तैयार कर दिए गए हैं। यह कार्य हालांकि बाड़मेर जिले में (अब बालोतरा) में है, लेकिन इस रूट का सीधा जुड़ाव भीलड़ी वाया जालोर जिले से होकर है तो इसका भविष्य में फायदा सुगम सफर के रूप में जालोर जिले के यात्रियों को भी मिलेगा।
लूनी-समदड़ी-भीलड़ी वाया जालोर रेलमार्ग का दोहरीकरण।

जालोर जिले के रेल यात्रियों को भी मिलेगी राहत
मदड़ी-भीलड़ी रेलखंड जालोर जिले के लिए महत्वपूर्ण रेल संपर्क मार्ग है। इस रेलमार्ग के दोहरीकरण से जालोर जिला मुख्यालय सहित जिले के 21 अन्य स्टेशनों को लाभ मिलने की उम्मीद है। दोहरी लाइन होने से एक ही ट्रैक पर ट्रेनों की आवाजाही का दबाव कम होगा। इससे ट्रेनों के संचालन में सुगमता, क्षमता में वृद्धि और भविष्य में यात्री एवं मालगाडिय़ों के संचालन के लिए बेहतर आधार तैयार होगा।

सतलाना, दूदिया और दुंदाड़ा यार्ड में लूप लाइनों को अप मेन लाइन में परिवर्तित किया गया है। इसके लिए करीब 800 मीटर पुराना ट्रैक हटाकर नई नींव तैयार की गई और नई लाइन बिछाई गई। इससे यार्ड और ब्लॉक सेक्शन के बीच ट्रैक सेंटर की दूरी का अंतर दूर हुआ है। साथ ही यार्ड के प्रवेश मार्ग पर दो एस आकार के मोड़ की आवश्यकता भी समाप्त हो गई है। परिवर्तित अप मेन लाइन का ट्रैक ढांचा 160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति के अनुरूप तैयार किया गया है। समदड़ी-भीलड़ी वाया जालोर भी भविष्य में इसी रफ्तार के लिए अपग्रेड होगा।

प्लेटफॉर्म बदलना होगा आसान
सतलाना, दूदिया और दुंदाड़ा स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म के बीच सब-वे निर्माण पूरा कर लिया गया है। यहां स्टेशन भवनों, प्लेटफॉर्म और ओएचई खंभों के बीच सीमित जगह होने के कारण एयर पुशिंग तकनीक से सब-वे लॉन्च किए गए। इससे यात्रियों को एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म तक पहुंचने में आसानी होगी। खासकर बुजुर्गों, बच्चों और सामान लेकर चलने वाले यात्रियों को राहत मिलेगी।