TIL Desk नई दिल्ली:👉अक्टूबर महीने की पहली तारीख से ही देश में कई बड़े आर्थिक बदलाव लागू हो गए हैं, जिनका सीधा असर आम उपभोक्ताओं के बजट पर पड़ रहा है। इस महीने की शुरुआत तेल कंपनियों द्वारा कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में की गई बढ़ोतरी से हुई है। देश के प्रमुख महानगरों में कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम करीब 48 से 50 रुपये तक बढ़ा दिए गए हैं। हालांकि, घरेलू रसोई गैस (14.2 किलोग्राम) की कीमतों में कोई बदलाव नहीं कर राहत दी गई है, लेकिन कमर्शियल गैस महंगी होने से बाहर खाना-पीना और रेस्टोरेंट का बिल बढ़ना तय माना जा रहा है।
त्योहारी सीजन में रसोई का बजट बिगड़ा
अक्टूबर और नवंबर का महीना देश में त्योहारों का होता है। नवरात्रि, दशहरा और दिवाली जैसे बड़े त्योहारों के ठीक पहले खाद्य तेलों, दालों और सब्जियों की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। सरकार द्वारा हाल ही में खाद्य तेलों पर आयात शुल्क बढ़ाने के फैसले के बाद से बाजार में सरसों तेल, सोयाबीन तेल और पाम ऑयल की कीमतों में उछाल आया है। इसके अलावा, बारिश और सप्लाई चेन प्रभावित होने के कारण प्याज, टमाटर और आलू जैसी बुनियादी सब्जियों के दाम भी आसमान छू रहे हैं, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों का मासिक बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है।
हवाई सफर और अन्य सेवाएं भी महंगी
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण विमान ईंधन (ATF) की दरों में भी बदलाव देखा गया है। इससे त्योहारी सीजन में घर जाने वाले लोगों के लिए हवाई टिकट महंगे हो सकते हैं। इसके साथ ही, कई राज्यों में लोकल ट्रांसपोर्ट और माल ढुलाई महंगी होने से रोजमर्रा की अन्य वस्तुओं पर भी इसका अप्रत्यक्ष असर देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले दिनों में सीएनजी और पीएनजी की कीमतों में भी इजाफा हो सकता है।
कुल मिलाकर, अक्टूबर का यह महीना आम उपभोक्ताओं के लिए वित्तीय मोर्चे पर कड़ी परीक्षा लेने वाला साबित हो रहा है।












