TIL Desk नई दिल्ली:👉  वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भारत के ऊर्जा आयात (Energy Imports) के मोर्चे से एक बड़ी खबर सामने आई है। कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म केप्लर (Kpler) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, ओमान सितंबर महीने में अमेरिका को पीछे छोड़कर भारत का सबसे बड़ा एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) आपूर्तिकर्ता बन गया है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सुरक्षा जोखिमों के बीच भारत द्वारा अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए सोर्सिंग में विविधीकरण (Diversification) करने की रणनीति का यह एक बड़ा परिणाम माना जा रहा है।

ओमान की हिस्सेदारी बढ़कर हुई 27 फीसदी
आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने सितंबर के दौरान ओमान से रिकॉर्ड 5,85,000 टन एलएनजी का आयात किया, जो अगस्त महीने की तुलना में करीब 11.6 प्रतिशत अधिक है। इस बड़ी उछाल के साथ भारत के कुल एलएनजी आयात बास्केट में अकेले ओमान की हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 27 प्रतिशत हो गई है। ओमान की भौगोलिक स्थिति जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बाहर होने के कारण इसे परिवहन के लिहाज से काफी सुरक्षित और रणनीतिक रूप से फायदेमंद माना जा रहा है।

तीसरे नंबर पर फिसला अमेरिका, नाइजीरिया दूसरे स्थान पर
अगस्त महीने में भारत को सबसे ज्यादा एलएनजी सप्लाई करने वाला अमेरिका अब सीधे तीसरे स्थान पर खिसक गया है। सितंबर में अमेरिका से आने वाली सप्लाई में करीब 59 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे उसकी बाजार हिस्सेदारी घटकर 16 फीसदी रह गई। वहीं दूसरी तरफ, नाइजीरिया 3,51,000 टन एलएनजी की आपूर्ति के साथ भारत का दूसरा सबसे बड़ा सप्लायर बनकर उभरा है।

कतर की हिस्सेदारी में ऐतिहासिक गिरावट
इस फेरबदल में सबसे बड़ा झटका कतर (Qatar) को लगा है। कभी भारत की कुल एलएनजी जरूरतों का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा अकेले पूरा करने वाला कतर अब छठे स्थान पर पहुंच गया है। सितंबर में कतर से केवल 94,000 टन गैस की आपूर्ति हुई, जिससे उसकी बाजार हिस्सेदारी घटकर महज 4.3 प्रतिशत रह गई है।

कुल आयात में 14% की कमी
अगर समग्र रूप से देखा जाए तो सितंबर में भारत का कुल एलएनजी आयात अगस्त के 25 लाख टन से लगभग 14 प्रतिशत घटकर 21.7 लाख टन रह गया है। भारत के लिए प्राकृतिक गैस बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसका उपयोग उर्वरक उत्पादन, बिजली उत्पादन, उद्योगों और शहरी सीएनजी परिवहन में बड़े पैमाने पर होता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत अब अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कनाडा, अल्जीरिया, ब्राजील और मोजाम्बिक जैसे नए बाजारों से भी आपूर्ति बढ़ाने की कोशिशों में जुटा है।