TIL Desk वाशिंगटन/नई दिल्ली:👉भारत और अमेरिका के आर्थिक रिश्तों में एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि दोनों देश एक बड़े व्यापार समझौते (ट्रेड डील) के बेहद करीब पहुंच चुके हैं. व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने स्पष्ट संकेत दिए कि यह आगामी ऐतिहासिक समझौता पहले किए गए पारंपरिक करारों से बिल्कुल अलग और अनूठा होगा.
'यह डील पहले जैसी नहीं होगी': ट्रंप
ओवल ऑफिस में जब राष्ट्रपति ट्रंप से भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता की प्रगति के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, "वे (भारत) समझौता करना चाहते हैं और हम भी इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं। हम समझौते के काफी करीब हैं." हालांकि, ट्रंप ने इसके प्रारूप को लेकर उत्सुकता बढ़ाते हुए आगे कहा, "यह हमारे द्वारा अतीत में किए गए समझौतों की तुलना में बहुत अलग तरह का सौदा होने जा रहा है." हालांकि उन्होंने इस नई रूपरेखा के तकनीकी विवरणों का पूरी तरह खुलासा नहीं किया, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसमें पारस्परिक बाजार पहुंच और टैरिफ संरचनाओं को लेकर बड़े बदलाव हो सकते हैं.
कूटनीतिक हलचल और मार्को रुबियो का भारत दौरा
राष्ट्रपति ट्रंप का यह महत्वपूर्ण बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत के दौरे पर हैं. रुबियो ने भारतीय नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, आधुनिक तकनीक और लोगों के आपसी संबंधों (पीपुल-टू-पीपुल टाइज) जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर व्यापक चर्चा की है. इससे पहले, भारतीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर के साथ मुलाकात कर इस व्यापार समझौते की बारीकियों और अंतिम रूपरेखा पर चर्चा की थी.
दोनों देशों के बाजारों को क्या होगा फायदा?
विशेषज्ञों के अनुसार, इस समझौते के लागू होने से भारत के प्रमुख निर्यात क्षेत्रों जैसे:
- फार्मास्यूटिकल्स (दवाइयां)
- आईटी सेवाएं और इलेक्ट्रॉनिक्स
- कपड़ा और इंजीनियरिंग सामान
इन सभी सेक्टर्स को अमेरिकी बाजारों में बड़ी और आसान पहुंच मिल सकती है. दूसरी ओर, अमेरिका अपने कृषि और औद्योगिक उत्पादों के लिए भारत के विशाल और तेजी से बढ़ते उपभोक्ता बाजार में कम टैरिफ (सीमा शुल्क) पर एंट्री चाहता है. इसके अलावा, दोनों देशों के बीच ऊर्जा और क्रिटिकल सप्लाई चेन सुरक्षा को लेकर भी रणनीतिक साझेदारी मजबूत हो रही है. दोनों देशों का लक्ष्य आने वाले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाना है.












