नई दिल्ली

भारत की सिंधु जल संधि पर सख्ती बरकरार है. सिंधु जल संधि खत्म होने से पाकिस्तान पानी के बगैर तड़प रहा है. उसकी आवाम बूंद-बूंद को तरस रही है. पाकिस्तान बार-बार सिंधु जल संधि बहाल करने की गुहार लगा रहा है. भारत है कि टस से मस नहीं हो रहा. भारत का स्टैंड क्लियर एंड लाउड है. खून और पानी साथ-साथ नहीं बह सकते. पहले आतंकवाद से तौबा करो, तभी पानी मिलेगा. भारत की इसी सख्ती को देखते हुए एक बार फिर पाकिस्तान गिड़गिड़ाया है. इस बार तो अमेरिका में जाकर पाकिस्तान ने गुहार लगाई है कि प्लीज कोई भारत से सिंधु का पानी दिलवा दो।  

जी हां, भारत के साथ सिंधु जल समझौते को लेकर पाकिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने गुहार लगाता नजर आया है. पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने अमेरिका में कहा कि सिंधु नदी प्रणाली पाकिस्तान के लिए जीवनरेखा है. पाकिस्तान की 25 करोड़ से ज्यादा आबादी की जिंदगी इससे जुड़ी हुई है. उन्होंने भारत से सिंधु जल संधि को बहाल करने की अपील करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की. इशाक डार ने यह बयान अमेरिका में पाकिस्तानी दूतावास की ओर से आयोजित एक वर्चुअल सेमिनार में दिया. उन्होंने भारत के अप्रैल 2025 में सिंधु जल संधि को स्थगित करने के फैसले पर चिंता जताई. गौरतलब है कि पहलगाम अटैक के बाद भारत ने सिंधु जल समझौता खत्म कर दिया था। 

सिंधु जल संधि पर फिर गिड़गिड़ाया पाकिस्तान
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित किए जाने पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की राष्ट्रीय स्थिरता के लिए जल सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है. साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि इस मुद्दे का असर पूरे क्षेत्र पर पड़ सकता है. इशाक डार ने कहा, ‘भारत का अप्रैल 2025 में सिंधु जल संधि को एकतरफा तरीके से स्थगित करने का फैसला इस संधि के तहत किसी आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता.’ पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने एक तरफ भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत और सहयोग की जरूरत बताई, लेकिन दूसरी तरफ संधि बहाल नहीं होने की स्थिति में इसके गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी. बहरहाल, डार के बयान से साफ जाहिर होता है कि पाकिस्तान संधु जल संधि स्थगित होने से कितना झुंझला गया है। 

सिंधु का पानी पाकिस्तान के लिए इतना अहम क्यों?
पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने कहा कि सिंधु नदी प्रणाली केवल पानी का स्रोत नहीं है, बल्कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से भी सीधे जुड़ी हुई है. उन्होंने कहा कि सिंधु बेसिन पाकिस्तान के 25 करोड़ से ज्यादा लोगों की जीवनरेखा है. इशाक डार के मुताबिक, पाकिस्तान की कृषि, खाद्य सुरक्षा, बिजली उत्पादन, लोगों की आजीविका और आर्थिक विकास सिंधु नदी प्रणाली के पानी पर काफी हद तक निर्भर हैं. ऐसे में पानी की सुरक्षा सीधे तौर पर आर्थिक सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और अंततः राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ जाती है. उन्होंने कहा कि सिंधु नदी के पानी को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी तरह का तनाव केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा. इसका असर पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता पर पड़ सकता है। 

जल संकट के लिए जलवायु परिवर्तन का भी दिया हवाला
पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने अपने देश के बढ़ते जल संकट का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान पहले से ही दुनिया के सबसे ज्यादा जल-संकट वाले देशों में शामिल है. पिछले कई दशकों में देश में प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता में भारी गिरावट आई है. उन्होंने जलवायु परिवर्तन को भी बड़ी चुनौती बताया. डार ने कहा कि बारिश के बदलते पैटर्न, ग्लेशियरों के पिघलने, विनाशकारी बाढ़, लंबे समय तक चलने वाले सूखे और पानी के प्रवाह में बढ़ती अनिश्चितता ने पाकिस्तान की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों को देखते हुए भारत और पाकिस्तान के बीच पानी के मुद्दे पर ज्यादा सहयोग होना चाहिए. हालांकि, पाकिस्तान की यह अपील ऐसे समय में आई है जब दोनों देशों के रिश्ते बेहद तनावपूर्ण हैं। 

गिड़गिड़ा भी रहा और धमका भी रहा
इशाक डार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से समर्थन मांगते हुए भारत को चेतावनी भी दी. उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान को सिंधु जल संधि के तहत मिले पानी के अधिकार से वंचित करने की कोशिश की गई तो इसके क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि सिंधु नदी को टकराव की वजह नहीं बनना चाहिए. यह क्षेत्र के लोगों के लिए जीवन, आजीविका और सभ्यता का स्रोत रही है. डार ने कहा कि साझा जल संसाधनों को हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए. पाकिस्तान की ओर से यह अपील ऐसे समय में सामने आई है जब भारत ने सिंधु जल संधि को लेकर अपना रुख बेहद स्पष्ट कर रखा है। 

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने लिया था बड़ा फैसला
अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला किया था. इस हमले में 26 नागरिकों की जान गई थी. भारत ने इस हमले के पीछे पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को जिम्मेदार ठहराया था.भारत ने साफ कहा था कि आतंकवाद और सामान्य संबंध एक साथ नहीं चल सकते. इसी संदर्भ में भारत ने अपनी नीति को ‘खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते’ के सिद्धांत को दोहराया. नई दिल्ली का कहना है कि जब तक पाकिस्तान अपनी जमीन से भारत के खिलाफ चल रहे सीमा पार आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ ठोस, सत्यापन योग्य और अपरिवर्तनीय कार्रवाई नहीं करता, तब तक सिंधु जल संधि को सामान्य रूप से लागू नहीं किया जाएगा। .

पाकिस्तान की अपील के पीछे बढ़ता दबाव
पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक और संसाधन संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहा है. ऐसे में पानी का मुद्दा उसके लिए और भी संवेदनशील हो गया है. कृषि क्षेत्र के लिए सिंचाई का पानी बेहद महत्वपूर्ण है. इसके अलावा बिजली उत्पादन और खाद्य सुरक्षा भी जल संसाधनों से जुड़ी हुई है. यही वजह है कि भारत के फैसले के बाद पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाता रहा है. अब इशाक डार ने भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मामले में समर्थन मांगा है. हालांकि भारत अपने रुख से पीछे हटता नहीं दिख रहा है. नई दिल्ली का स्पष्ट संदेश है कि आतंकवाद और पानी पर सहयोग को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता. भारत का कहना है कि पाकिस्तान की ओर से सीमा पार आतंकवाद जारी रहने की स्थिति में पुराने ढर्रे पर द्विपक्षीय सहयोग संभव नहीं है।