पटना
मानसून की विदाई का समय करीब आ गया है, लेकिन बिहार में अबकी बार बारिश का वितरण बेहद असमान रहा है। स्थिति यह है कि मानसून सीजन समाप्त होने में कुछ ही सप्ताह शेष हैं, इसके बावजूद राज्य के किसी भी जिले में सामान्य के मुकाबले 60 प्रतिशत या उससे अधिक बारिश दर्ज नहीं हो सकी है।
कई इलाकों में कम बारिश के कारण खेती प्रभावित हुई, वहीं दूसरी ओर नदियों में नेपाल और पड़ोसी राज्यों से आए पानी के कारण 14 जिलों में बाढ़ की विकट स्थिति बनी हुई है। यानी बारिश की कमी और बाढ़, दोनों तस्वीरें एक साथ देखने को मिल रही है।
ऐसे तमाम झंझावात के बीच किसानों ने कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार 99 प्रतिशत धान की रोपनी कर दी। महत्वपूर्ण यह है कि 26 जिलों में सौ प्रतिशत या उससे अधिक रोपनी हुई है।
पांच जिलों में किसानों ने सौ प्रतिशत से अधिक धान लगाया है। ऐसे जिलों में जहानाबाद, गोपालगंज, मूंगेर, शेखपुरा एवं किशनगंज जिले हैं।
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस मानसून में बिहार में बारिश का वितरण लगातार उतार-चढ़ाव वाला रहा। कई दौर में अच्छी बारिश हुई, लेकिन उसका क्षेत्रवार फैलाव समान नहीं रहा। कुछ जिलों में एक-दो दिनों में भारी बारिश हुई, जबकि लंबे अंतराल तक बारिश नहीं होने से कुल मौसमी आंकड़ा सामान्य से नीचे बना रहा।
किसानों के लिए बारिश का असमान वितरण चिंता
मौसम की इस असमानता का सीधा असर खरीफ (शारदीय) फसलों पर पड़ा है। जिन क्षेत्रों में समय पर पर्याप्त बारिश नहीं हुई, वहां धान समेत अन्य फसलों की सिंचाई के लिए किसानों को अतिरिक्त खर्च करना पड़ा।
वहीं, बाद में बाढ़ ने कई इलाकों में खेतों में पानी जमा कर दिया। इससे फसल खराब होने की आशंका बढ़ गई है।
सितंबर की बारिश पर टिकी उम्मीद
मानसून की विदाई से पहले सितंबर की बारिश किसानों और जलस्रोतों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मौसम विभाग ने बिहार समेत कई राज्यों में अगले कुछ दिनों के दौरान बारिश जताई है।
ऐसे में आने वाले दिनों की बारिश राज्य के मौसमी आंकड़े को कुछ सुधार सकती है, लेकिन मानसून के अंतिम चरण तक भी यदि व्यापक बारिश नहीं हुई तो इस साल का मानसून बिहार के लिए कम बारिश, असमान वितरण और बाढ़ की दोहरी मार के रूप में दर्ज हो सकता है।














