पटना
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शनिवार को ऊर्जा आडिटोरियम में 9वें माटी-पूर्वांचल महोत्सव में शामिल हुए।

माटी संस्था द्वारा आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने पूर्वांचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, कला, साहित्य, शिक्षा और सामाजिक योगदान को रेखांकित किया।

सीएम ने कहा कि प्रदेश में बज्जिका, मगही, मैथिली, भोजपुरी और अंगिका जैसी भाषाएं बोली जाती हैं, जो राज्य की विविधतापूर्ण सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती हैं।

दोनों राज्‍यों की साझा संस्‍कृत‍ि से विकस‍ित भारत में दे रही योगदान
मुख्यमंत्री ने कहा कि वे पूर्वांचल को बिहार और उत्तर प्रदेश, दोनों के संदर्भ में देखते हैं। दोनों राज्यों की साझा सांस्कृतिक विरासत और मानवीय संसाधन देश को विकसित भारत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली लोक गायिका पद्मश्री से अलंकृत मालिनी अवस्थी, पूर्व क्रिकेटर सैयद सबा करीम, श्वेता सिंह, बैंक आफ बड़ौदा के एमडी ब्रजेश कुमार सिंह, पटना उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह, चिकित्सक डा. राजीव रंजन, शशांक कुमार तथा फुटबाल खिलाड़ी मधु कुमारी को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि माटी महोत्सव के माध्यम से बिहार के गौरवशाली इतिहास, संस्कृति और विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य किया जाना चाहिए।

हमें अपनी माटी का फर्ज निभाना है और अपनी माटी का ऋण लौटाना है। महोत्सव में पूर्वांचल का खान-पान, लोकगीत-संगीत, मिलना-मिलाना, परिचर्चा और ''माटी सम्मान'' जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जो क्षेत्र की सांस्कृतिक विविधता को सामने लाता है।

मौके पर कला एवं संस्कृति मंत्री डा. प्रमोद कुमार, सांसद व माटी संस्था के संरक्षक जगदम्बिका पाल, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, माटी संस्था के संयोजक आसिफ आजमी, दानिश इकबाल आदि मौजूद रहे। मालिनी अवस्थी ने लोक गीतों से शाम को यादगार बना दी।

नालंदा का रहा गौरवशाली इतिहास
सीएम ने कहा कि बिहार की धरती ने देश और दुनिया को अनेक महान व्यक्तित्व दिए हैं। श्री गुरु गोविंद सिंह जी की जन्मभूमि, भगवान महावीर की कर्मभूमि और भगवान बुद्ध के ज्ञान प्राप्ति से जुड़ी यह धरती अपनी समृद्ध आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा के लिए जानी जाती है।

मोहनदास करमचंद गांधी की महात्मा की उपाधि भी बिहार की धरती से जुड़ी रही है। उन्होंने कहा कि नालंदा जाकर देखें तो हजारों वर्ष पूर्व बिहार की शिक्षा और ज्ञान की समृद्ध परंपरा का प्रमाण मिलता है।

नालंदा विश्वविद्यालय दुनिया के प्रमुख प्रमुख शिक्षा केंद्रों में शामिल था। बिहार की संस्कृति और ज्ञान परंपरा कितनी व्यवस्थित और समृद्ध रही है, इसका अंदाजा नालंदा के गौरवशाली इतिहास से लगाया जा सकता है।