इंदौर 
 मध्यप्रदेश में सेमीकंडक्टर उद्योग और तकनीकी निवेश को बढ़ावा देने के लिए इंदौर में 23 और 24 अक्टूबर को MP Semiconductor Summit 2026 का आयोजन किया जाएगा। बिलियंट कन्वेंशन सेंटर में होने वाली इस दो दिवसीय समिट में देश-विदेश की 50 से अधिक कंपनियों के शामिल होने की संभावना है। कार्यक्रम में चिप निर्माण, नई तकनीकों और मध्यप्रदेश को सेमीकंडक्टर हब के रूप में विकसित करने की रणनीति पर चर्चा होगी।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे उद्घाटन सत्र को संबोधित
समिट के पहले दिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उद्घाटन सत्र को संबोधित करेंगे। इसमें निवेशकों, उद्योग विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और स्टार्टअप प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। कार्यक्रम का उद्देश्य सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश के अवसर बढ़ाना और राज्य में तकनीकी विनिर्माण को प्रोत्साहित करना है।

चिप डिजाइन से एडवांस पैकेजिंग तक होगी चर्चा
दो दिवसीय समिट में चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर निर्माण और एडवांस पैकेजिंग जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों पर विचार-विमर्श होगा। कार्यक्रम में 8 पैनल चर्चाएं, 5 राउंड टेबल बैठकें और 2 मुख्य व्याख्यान आयोजित किए जाने की योजना है। इसके अलावा क्वांटम टेक्नोलॉजी, फोटोनिक्स और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। इन क्षेत्रों में नई तकनीकों, उद्योग की जरूरतों और निवेश की संभावनाओं पर चर्चा होगी।

मध्यप्रदेश सेमीकंडक्टर नीति-2025 पर रहेगा फोकस
समिट में मध्यप्रदेश को सेमीकंडक्टर उद्योग का प्रमुख केंद्र बनाने के विजन पर मंथन होगा। सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिए मध्यप्रदेश सेमीकंडक्टर नीति-2025 को मंजूरी देने की योजना भी कार्यक्रम का अहम हिस्सा है। नीति के जरिए राज्य में चिप निर्माण और संबंधित उद्योगों के विकास को प्रोत्साहित करने पर जोर रहेगा। इससे निवेशकों को आकर्षित करने और तकनीकी क्षेत्र में नए अवसर पैदा करने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है।

पारस सेमीकंडक्टर्स के साथ 6,200 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्तावित MOU
समिट के दौरान पारस सेमीकंडक्टर्स के साथ 6,200 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश को लेकर समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए जाने की जानकारी दी गई है। यह प्रस्तावित निवेश मध्यप्रदेश में सेमीकंडक्टर उद्योग के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, निवेश प्रस्ताव और MOU के वास्तविक क्रियान्वयन से जुड़ी शर्तों तथा आगे की प्रक्रिया की पुष्टि आधिकारिक जानकारी के आधार पर की जानी होगी।

सेमीकंडक्टर हब बनने की दिशा में मध्यप्रदेश की तैयारी
MP Semiconductor Summit 2026 के जरिए मध्यप्रदेश सरकार का लक्ष्य चिप निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देना है। इंदौर में होने वाली इस समिट में उद्योग जगत और तकनीकी विशेषज्ञों की भागीदारी से राज्य की सेमीकंडक्टर रणनीति को आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी।

चर्चा में क्यों?

मध्य प्रदेश सेमीकंडक्टर समिट 2026 का आयोजन 23–24 अक्तूबर 2026 को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में आयोजित होने वाले इस समिट का उद्देश्य निवेश आकर्षित करना, तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देना और मध्य प्रदेश को सेमीकंडक्टर उद्योग के केंद्र के रूप में विकसित करना है। 

प्रमुख बिंदु

  • समिट का प्रमुख विवरण: मुख्यमंत्री डॉ. यादव ‘मध्य प्रदेश की सेमीकंडक्टर हब बनने की परिकल्पना’ विषयक आरंभिक सत्र को संबोधित करेंगे।
    • प्रतिभागी: घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय सेमीकंडक्टर कंपनियाँ, निवेशक, उद्योग विशेषज्ञ, शिक्षाविद् और स्टार्टअप प्रतिनिधि।
    • प्रदर्शनी: 50 से अधिक कंपनियाँ अपनी प्रौद्योगिकियों, उत्पादों और समाधानों का प्रदर्शन करेंगी।
  • समिट के प्रमुख विषय:
    • सेमीकंडक्टर विनिर्माण: मध्य प्रदेश में सेमीकंडक्टर से संबंधित विनिर्माण क्षमताओं के विकास के अवसरों का अन्वेषण करना।
    • चिप डिज़ाइन: डिज़ाइन क्षमताओं और एक सुदृढ़ सेमीकंडक्टर डिज़ाइन इकोसिस्टम को बढ़ावा देना।
      • उन्नत पैकेजिंग और परीक्षण: सेमीकंडक्टर असेंबली, पैकेजिंग और परीक्षण के केंद्र के रूप में राज्य की क्षमता का आकलन करना।
      • इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण: सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकियों और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन की कड़ियों का सुदृढ़ीकरण करना।
    • अनुसंधान और नवाचार: उद्योग, शैक्षणिक संस्थानों और अनुसंधान संगठनों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करना।
    • कौशल विकास: सेमीकंडक्टर और उभरती प्रौद्योगिकी के उद्योगों के लिये कुशल कार्यबल तैयार करना।
  • कार्यक्रम की संरचना:
    • आठ पैनल चर्चाएँ: इसका उद्देश्य सेमीकंडक्टर विनिर्माण, चिप डिज़ाइन, आपूर्ति शृंखलाओं और उभरती प्रौद्योगिकियों का आकलन करना है।
    • पाँच गोलमेज़ बैठकें: यह कंपनियों, निवेशकों और शैक्षणिक संस्थानों संबंधी विचार-विमर्श को सुविधाजनक बनाने हेतु परिकल्पित है।
    • दो मुख्य संबोधन: यह निवेश के अवसरों और राज्य की सेमीकंडक्टर संबंधी महत्त्वाकांक्षाओं को उजागर करेगा।
    • स्टार्टअप को बढ़ावा: मध्य प्रदेश सेमीकॉन स्टार्टअप प्रतियोगिता के अंतिम चरण के विजेताओं को समापन समारोह के दौरान सम्मानित किया जाना निर्धारित है।
  • मध्य प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति 2025:
    • राज्य सरकार ने निवेश आकर्षित करने और सेमीकंडक्टर क्षेत्र के विकास को प्रोत्साहित करने के लिये मध्य प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति 2025 को स्वीकृति दी है।
    • इस नीति संबंधी सूचित प्रावधानों के अनुसार, प्रोत्साहनों में 25% सब्सिडी और लागू शर्तों के अधीन 10 वर्षों के लिये ₹2 प्रति यूनिट की दर से बिजली शामिल है।
    • इस नीति का उद्देश्य सेमीकंडक्टर विनिर्माण, प्रौद्योगिकी विकास और संबद्ध उद्योगों के लिये अनुकूल परिवेश तैयार करना है।
  • सेमीकंडक्टर की महत्त्वपूर्ण अवधारणाएँ:
    • सेमीकंडक्टर: ऐसी सामग्री जिसकी विद्युत चालकता चालक और कुचालक के बीच होती है। सेमीकंडक्टर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का आधार हैं।
    • चिप डिज़ाइन: कंप्यूटिंग, संचार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे अनुप्रयोगों के लिये एकीकृत परिपथों को डिज़ाइन करने की प्रक्रिया।
    • फैबलेस इकोसिस्टम: एक व्यवसाय मॉडल, जिसमें कंपनियाँ चिप का डिज़ाइन और विकास करती हैं, लेकिन उनके भौतिक विनिर्माण का कार्य विशेषीकृत फैब्रिकेशन सुविधाओं को आउटसोर्स करती हैं।
    • OSAT: आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट; इसमें सेमीकंडक्टर उपकरणों को असेंबल करना, उनकी पैकेजिंग करना और उनके प्रदर्शन का परीक्षण करना शामिल है।
    • फोटोनिक्स: प्रकाश के उत्पादन, नियंत्रण और संसूचन का विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी।
    • क्वांटम प्रौद्योगिकियाँ: ऐसी प्रौद्योगिकियाँ जो कंप्यूटिंग, संचार और संवेदन जैसे अनुप्रयोगों के लिये क्वांटम यांत्रिकी के सिद्धांतों का उपयोग करती हैं।
  • मध्य प्रदेश के लिये महत्त्व:
    • निवेश आकर्षण: समिट निवेश के अवसरों और नीतिगत प्रोत्साहनों को प्रस्तुत करने के लिये एक मंच प्रदान करता है।
    • औद्योगिक विविधीकरण: सेमीकंडक्टर से संबंधित गतिविधियाँ राज्य के औद्योगिक आधार का विस्तार कर सकती हैं।
    • उद्योग–शिक्षा जगत सहयोग: कंपनियों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच संवाद अनुसंधान तथा कार्यबल विकास में सहयोग कर सकता है।