कानपुर
अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर जहाजों की कमी और कंटेनर की उपलब्धता प्रभावित होने से शिपिंग फ्रेट में बेतहाशा बढ़ोतरी ने कानपुर के लेदर फुटवियर और लेदर गुड्स उद्योग की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

निर्यातकों के मुताबिक कुछ महीने पहले तक जिस 40 फीट हाई-क्यूब कंटेनर का इटली तक भेजने का समुद्री भाड़ा करीब 1,300-1,500 डालर था, वह 17 अगस्त 2026 तक बढ़कर 7,650 डालर पहुंच गया। यानी करीब छह गुणा तक की बढ़ोतरी ने निर्यात की लागत का पूरा गणित बिगाड़ दिया है।

बढ़ते मालभाड़े के कारण विदेशी खरीदार भी अतिरिक्त लागत उठाने से पीछे हट रहे हैं। इसका सीधा असर शिपमेंट पर पड़ा है और पिछले करीब एक महीने से कानपुर से लगभग 1,000 करोड़ रुपये के लेदर और लेदर प्रोडक्ट्स का निर्यात आर्डर रुका हुआ है। माल - भाड़ा में बड़े अंतर के कारण खरीदारों ने भी घाटा सहने से मना कर दिया और आर्डर की आपूर्ति रोक दी है।

लेदर निर्यातकों के अनुसार इटली के लिए 40 फीट हाई-क्यूब कंटेनर का माल - भाड़ा 24 फरवरी 2026 को 1,300 डालर यानी 270841 रुपये था वह 19 मार्च को यह 3,316 डालर, 19 जून को 3,745 डालर, एक जुलाई को 5,125 डालर और 15 जुलाई को 5,591 डालर पहुंच गया।

17 अगस्त को यही दर 7,650 डॉलर यानी 856622 रुपये दर्ज की गई। लगभग छह लाख रुपये का माल - भाड़ा अंतर निर्यातकों पर भारी पड़ रहा है। फरवरी के मुकाबले अगस्त में समुद्री माल भाड़े में करीब 488 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। जो प्रति वर्गफुट 0.90 रुपये से बढ़कर 2.86 रुपये हो गया है।

लेदर फुटवियर और लेदर गुड्स में पहले से ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा काफी अधिक है। ऐसे में अचानक बढ़े समुद्री भाड़े को विदेशी खरीदारों पर डालना मुश्किल हो रहा है। निर्यातकों का कहना है कि कई मामलों में बढ़ा हुआ फ्रेट उनके पूरे लाभ मार्जिन को समाप्त कर रहा है।

कानपुर से हर वर्ष करीब 8,000 से 10,000 करोड़ रुपये के लेदर और लेदर उत्पादों का निर्यात होता है। शुरुआती दौर में कुछ निर्यातकों ने विदेशी खरीदारों के साथ लागत बांटकर या कंपनसेशन के माध्यम से शिपमेंट जारी रखने की कोशिश की, लेकिन लगातार बढ़ते फ्रेट ने स्थिति को गंभीर बना दिया।

अब खरीदारों ने भी साफ मना कर दिया है कि इतने अधिक दाम पर वह माल नहीं खरीदेंगे। इससे अमेरिका , यूरोप समेत कई देशों के आर्डर फिलहाल के लिए रोकने पड़े हैं।

निर्यातकों के अनुसार पिछले करीब एक महीने में लगभग 1,000 करोड़ रुपये का माल शिपमेंट में बाधा के कारण कारखानों, गोदामों और बंदरगाहों पर अटक गया है। यदि फ्रेट में जल्द राहत नहीं मिली तो इसका असर उत्पादन, नकदी प्रवाह और रोजगार पर भी पड़ सकता है।

तारीख और समुद्री फ्रेट रुपये में
    16 फरवरी- 1,520 डॉलर 2,78,912
    24 फरवरी- 1,300 डालर 2,70,841
    19 मार्च- 3,316 डालर 4,49,662
    20 अप्रैल-  2,200 डालर 3,58,900
    25 मई- 2,425 डालर 3,64,987
    19 जून- 3,745 डालर 5,04,970
    29 जून- 4,596 डालर 5,90,811
    21 जुलाई- 5,566 डालर 6,89,193
    17 अगस्त- 7,650 डालर 8,56,622

समुद्री मालभाड़े में राहत, कंटेनर उपलब्धता और शिपिंग शेड्यूल को लेकर तत्काल हस्तक्षेप की जरूरत है। जिससे कानपुर का लेदर निर्यात उद्योग अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति बनाए रख सके। पिछले एक महीने से निर्यात लगभग पूरी तरह से ठप हो गया है।
    - असद के इराकी - पूर्व सीएलई अध्यक्ष

    समुद्री और हवाई दोनों भाड़ा बढ़ जाने से निर्यात उद्याेग को संकट का सामना करना पड़ रहा है। दुनिया के देशों में भारतीय माल की मांग बनी हुई है लेकिन माल -भाड़ा बढ़ने से समय से माल भेजने में परेशानी हो रही है। वाणिज्य मंत्रालय को शिपिंग कंपनियों के साथ वार्ता कर स्थिति संभालने की कोशिश करनी होगी।
    - मुख्तारुल अमीन, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सीएलई