TIL Desk नई दिल्ली:👉दशहरा, दिवाली और छठ पूजा के इस पावन त्योहारी सीजन के बीच देश के करोड़ों डिजिटल ट्रांजैक्शन करने वाले यूजर्स और छोटे-बड़े व्यापारियों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने यूपीआई (UPI) पेमेंट्स पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) चार्ज लागू करने की 15 अक्टूबर 2026 की समयसीमा को आगे बढ़ाने का एक बड़ा फैसला लिया है। व्यापारियों और पेमेंट इंडस्ट्री से जुड़े विभिन्न संगठनों की मांग के बाद इस नियम के क्रियान्वयन को फिलहाल दिवाली के बाद तक के लिए टाल दिया गया है।

शुरुआती तौर पर तय किए गए नियम के मुताबिक, 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के कुछ मर्चेंट (P2M) भुगतानों पर 0.4% का एमडीआर शुल्क लगाया जाना प्रस्तावित था। हालांकि, त्योहारों के इस बंपर खरीदारी वाले सीजन में व्यापारिक संगठनों ने चिंता जताई थी कि इस कदम से न केवल बाजार की धारणा प्रभावित हो सकती है, बल्कि ग्राहकों और दुकानदारों के बीच भ्रम की स्थिति भी पैदा हो सकती है। व्यापारियों की संस्था कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) और कई अन्य मर्चेंट बॉडीज ने वित्त मंत्रालय और एनपीसीआई से इस व्यवस्था को कुछ समय के लिए स्थगित करने का जोरदार अनुरोध किया था। इसी पृष्ठभूमि में, एनपीसीआई ने सभी संबंधित हितधारकों को राहत देते हुए इस प्रस्तावित समयसीमा को आगे बढ़ा दिया है।

नए अपडेट के अनुसार, इस व्यवस्था को लागू करने की नई संभावित तारीख 1 जनवरी 2027 बताई जा रही है। हालांकि, एनपीसीआई आने वाले दिनों में इसकी अंतिम तारीख को लेकर औपचारिक तौर पर दिशा-निर्देश और पुष्टि साझा करेगा।

राहत की बात यह है कि इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद भी आम जनता या आम ग्राहकों पर इसका कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। प्रस्तावित 0.4% का एमडीआर पूरी तरह से एक मर्चेंट-साइड शुल्क है, जिसका भुगतान बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को केवल संबंधित व्यापारियों (दुकानदारों) द्वारा किया जाना है। इसके अलावा, आपके रोजाना के छोटे-मोटे डिजिटल भुगतान पूरी तरह सुरक्षित हैं। पर्सन-टू-पर्सन (P2P) यानी दोस्तों या परिवार को पैसे भेजने और 2,000 रुपये तक के किसी भी मर्चेंट पेमेंट पर भविष्य में भी कोई चार्ज नहीं लगेगा। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, देश के लगभग 95% से अधिक यूपीआई मर्चेंट ट्रांजैक्शन इसी मुफ्त श्रेणी के दायरे में आते हैं।