TIL Desk वाशिंगटन :👉अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की ओर से पेश किए गए सात दिनों के युद्धविराम (सीजफायर) के प्रस्ताव को साफ तौर पर खारिज कर दिया है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वे ईरान पर लगे नौसैनिक प्रतिबंधों को हटाने का कोई इरादा नहीं रखते हैं. इसके साथ ही राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने करीबियों और सलाहकारों से निजी बातचीत में कहा है कि नवंबर में होने वाले अमेरिकी मिड-टर्म (मध्यावधि) चुनावों के बाद ईरान पर फिर से हवाई हमले और बमबारी शुरू हो सकती है.
दरअसल, संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की बैठक के इतर कतर और अन्य मध्यस्थ देशों के जरिए ईरान ने अमेरिका के सामने एक '7-डे प्लान' पेश किया था. इस योजना के तहत ईरान ने वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को दोबारा खोलने और अमेरिका के साथ परमाणु कार्यक्रम पर फिर से बातचीत शुरू करने की पेशकश की थी. बदले में ईरान की मांग थी कि अमेरिका उसके बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करे, तेल निर्यात पर लगी पाबंदियों में ढील दे और लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सीजफायर लागू करे.
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने इस समझौते को जून में दोनों देशों के बीच हुए पुराने समझौते की तर्ज पर आगे बढ़ाने की उम्मीद जताई थी. हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप इस प्रस्ताव को लेकर बेहद संशय में हैं. वाशिंगटन का मानना है कि कड़े आर्थिक और सैन्य दबाव के चलते ही ईरान समझौते के लिए मजबूर होगा. ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वह तब तक पीछे नहीं हटेंगे जब तक कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करने की उनकी शर्तों को नहीं मान लेता. इस फैसले के बाद पश्चिम एशिया में एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव की आशंका गहरा गई है.












