TIL Desk  वाशिंगटन :👉अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने विदेशी टैलेंट और इमिग्रेशन नियमों को लेकर ट्रंप प्रशासन का कड़ा रुख साफ किया है | उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका को केवल असाधारण और सर्वश्रेष्ठ विदेशी टैलेंट (Extraordinary Foreign Talent) की जरूरत है | वेंस ने चेतावनी दी कि प्रशासन ऐसी किसी भी नीति या कार्यक्रम को बढ़ावा नहीं देगा, जो अमेरिकी कर्मचारियों की नौकरियों की कीमत पर विदेशी कामगारों को तरजीह देता हो |

दिग्गज कंपनियों पर लगा बड़ा बैन

इस सख्त नीति के तहत अमेरिकी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) और एडोब (Adobe) जैसी दिग्गज टेक कंपनियों को 'परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम' (PERM) से निलंबित कर दिया है | यह प्रोग्राम विदेशी कर्मचारियों को H-1B वीजा से स्थायी नागरिकता (ग्रीन कार्ड) दिलाने का एक मुख्य जरिया है | निलंबन के दायरे में कई भारतीय आईटी कंपनियां जैसे इन्फोसिस, टाटा, विप्रो, एचसीएल, और कॉग्निजेंट भी आई हैं |

'कम वेतन के लिए अमेरिकी कामगारों को निकालना मंजूर नहीं'

अमेरिकी उप राष्ट्रपति ने आरोप लगाया कि कई बड़ी कंपनियां स्थानीय कर्मचारियों की छंटनी कर रही हैं और उनकी जगह कम वेतन पर विदेशी कर्मचारियों को रख रही हैं | उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि माइक्रोसॉफ्ट ने हाल ही में हजारों अमेरिकी नागरिकों को नौकरी से निकाला और उसी दौरान बड़ी संख्या में H-1B वीजा और ग्रीन कार्ड के आवेदन किए | जेडी वेंस के अनुसार, H-1B वीजा पर आने वाले विदेशी कर्मचारी समान पद पर काम करने वाले अमेरिकी नागरिकों की तुलना में $20,000 से $48,000 तक कम वेतन पाते हैं, जिससे कंपनियां अनुचित लाभ उठा रही हैं |

सिर्फ 'सुपर-स्पेशलाइज्ड' जीनियस के लिए खुले हैं दरवाजे

वेंस ने साफ किया कि यह व्यवस्था केवल उन्हीं बेहद खास और 'जीनियस-लेवल' के प्रोफेशनल्स के लिए है, जिनकी योग्यता वाले लोग अमेरिका में आसानी से उपलब्ध नहीं हैं | उन्होंने तर्क दिया कि यदि कोई कंपनी वास्तव में किसी असाधारण और सुपर-स्पेशलाइज्ड व्यक्ति को अमेरिका लाना चाहती है, तो उसे उसके लिए अतिरिक्त वीज़ा शुल्क देने में भी कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए |

भारत ने जताई कड़ी आपत्ति

जेडी वेंस द्वारा विदेशी कामगारों के लिए की गई कुछ टिप्पणियों और इस नए फैसले पर भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने कड़ी आपत्ति जताई है | भारत ने अमेरिकी प्रशासन की इस शब्दावली को 'बेहद आपत्तिजनक' बताते हुए अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स के अमूल्य योगदान का बचाव किया है | इस नए बदलाव से अमेरिका में ग्रीन कार्ड और नौकरी की चाह रखने वाले हजारों भारतीय टेक प्रोफेशनल्स की चिंताएं बढ़ गई हैं |