लखनऊ,
 उत्तर प्रदेश सरकार अब अपने तेजी से विकसित हो रहे बौद्ध पर्यटन को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। इस कड़ी में जापान को प्रदेश का एक स्वाभाविक और महत्वपूर्ण साझेदार माना जा रहा है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने शुक्रवार को यामानाशी प्रीफेक्चर के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुए संवाद सत्र में कहा कि 'यामानाशी, जापानी पर्यटकों को उत्तर प्रदेश के बौद्ध और आध्यात्मिक स्थलों से जोड़ने में अहम भूमिका निभा सकता है।'

लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान (आईजीपी) में आयोजित कार्यक्रम में यामानाशी के गवर्नर कोटारो नागासाकी और डिप्टी-गवर्नर जुनिची इशिदेरा के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया। संवाद सत्र में उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और पर्यटन उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों ने दोनों क्षेत्रों के बीच मौजूद सांस्कृतिक संबंधों को पर्यटन गतिविधियों और संस्थागत सहयोग में बदलने की संभावनाओं पर चर्चा की।

बौद्ध सर्किट को वैश्विक बाजार से जोड़ने पर जोर
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि 'मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में वर्ष 2017 के बाद प्रदेश में बौद्ध पर्यटन के विकास की सोच में व्यापक बदलाव आया है। अब सरकार का फोकस केवल स्मारकों के विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि बेहतर कनेक्टिविटी, पर्यटक सुविधाओं, ठहरने की व्यवस्था और पर्यटन स्थलों पर बेहतर अनुभव उपलब्ध कराने पर भी है। उन्होंने कहा कि बौद्ध सर्किट के प्रमुख स्थलों पर मजबूत आधारभूत ढांचा तैयार किया गया है। अब सरकार की प्राथमिकता इस विकास को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने की है। भगवान बुद्ध की विरासत सदियों से भारत और जापान के लोगों को सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से जोड़ती रही है, इसलिए जापान उत्तर प्रदेश के लिए एक स्वाभाविक और महत्वपूर्ण साझेदार है।'

यामानाशी बनेगा जापान में यूपी पर्यटन का नया प्रवेश द्वार : जयवीर सिंह
मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि 'यामानाशी जापानी पर्यटकों को उत्तर प्रदेश से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की मंशा यामानाशी को उत्तर प्रदेश के पर्यटन के लिए जापान में एक मजबूत प्रवेश द्वार के रूप में विकसित करने की है। वहीं, उत्तर प्रदेश को बौद्ध धर्म, अध्यात्म, वेलनेस और भारतीय संस्कृति में रुचि रखने वाले जापानी पर्यटकों के लिए स्वाभाविक पर्यटन गंतव्य बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती, कपिलवस्तु, कौशाम्बी और संकिसा जैसे स्थल भगवान बुद्ध के जीवन और उनकी यात्राओं के अलग-अलग अध्यायों से पर्यटकों को जोड़ते हैं।

आर्थिक प्रगति और बौद्ध विरासत से निवेशकों को लुभा रहा यूपी'
अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब सिर्फ अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत ही नहीं, अपितु तेज आर्थिक विकास और मजबूत होते बुनियादी ढांचे के कारण भी निवेशकों की पसंद बन रहा है। उन्होंने कहा कि हाईवे, नागरिक उड्डयन, उद्योग और निवेश के क्षेत्र में प्रदेश ने तेजी से प्रगति की है। साथ ही उत्तर प्रदेश भगवान बुद्ध से जुड़े छह प्रमुख स्थलों की भूमि है, जहां जापानी पर्यटकों को शांति और आध्यात्मिक अनुभव के साथ समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि जापानी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम से पहले आगे बढ़ाया जाना उत्तर प्रदेश और जापान के बीच बढ़ते संवाद और मजबूत होते संबंधों का सकारात्मक संकेत है। अमृत अभिजात ने जापानी निवेशकों को प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र में मौजूद संभावनाओं का लाभ उठाने और पर्यटन उत्पादों व अनुभवों के विकास में निवेश करने के लिए आमंत्रित किया।

उत्तर प्रदेश की पर्यटन विविधता को कोइजुमी ने सराहा
यामानाशी के पर्यटन, संस्कृति एवं खेल विभाग के महानिदेशक योशीयुकी कोइजुमी ने उत्तर प्रदेश की पर्यटन विविधता और प्रतिनिधिमंडल के आत्मीय स्वागत की सराहना की। उन्होंने कहा कि 'प्रदेश में विरासत, आध्यात्मिकता, प्राकृतिक सौंदर्य और संस्कृति का अनूठा संगम है। कोइजुमी ने यह भी कहा कि यामानाशी और उत्तर प्रदेश के बीच मौजूद गहरे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंध दोनों प्रान्त के लोगों के बीच पर्यटन, आपसी आदान-प्रदान और बेहतर समझ को बढ़ावा देने का मजबूत आधार बन सकते हैं।
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दोनों ओर पर्यटकों की आवाजाही बढ़ाने पर संवाद
संवाद सत्र में उत्तर प्रदेश और यामानाशी के बीच पर्यटकों की आवाजाही बढ़ाने के लिए व्यावहारिक अवसरों और आवश्यकताओं पर भी चर्चा हुई। इस बीच, टॉर्नोस के संस्थापक एवं सीईओ तथा फिक्की पर्यटन समिति के अध्यक्ष प्रतीक हीरा ने कहा कि 'उत्तर प्रदेश और जापान की साझा सांस्कृतिक विरासत पर्यटन सहयोग के लिए स्वाभाविक आधार तैयार करती है। उत्तर प्रदेश भगवान बुद्ध की भूमि है और जापान में शिव, गणेश, सरस्वती, कुबेर, लक्ष्मण और यहां तक कि भगवान कृष्ण जैसे भारतीय देवी-देवताओं के प्रति भी श्रद्धा का भाव देखने को मिलता है। यामानाशी को जापान के 'फ्रूट बाउल' के रूप में जाना जाता है और उत्तर प्रदेश की मजबूत कृषि पहचान दोनों क्षेत्रों के बीच एक और समानता है। उन्होंने यह भी कहा कि हर वर्ष करीब दो लाख भारतीय ज