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‘गिव टू गेन’ के साथ महिला की हर भूमिका का सम्मान

‘गिव टू गेन’ के साथ महिला की हर भूमिका का सम्मान

TIL Desk मुंबई:👉अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर इस साल की थीम ‘गिव टू गेन’ इस विचार को सामने लाती है कि जब महिलाएँ प्रेम, साहस, मार्गदर्शन या अवसर देती हैं, तो बदले में उन्हें आत्मविश्वास, अनुभव और आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। एक महिला अपने जीवन में कई भूमिकाएँ निभाती है-जिम्मेदारियों और सपनों के बीच संतुलन बनाते हुए। इसी भावना को साझा करते हुए एण्डटीवी के प्रमुख कलाकारों ने अपने अनुभव साझा किए।

आगामी शो ‘हे भगवान-कितना बदल गया इंसान‘ में ईना की भूमिका निभा रहीं अक्षया नाइक कहती हैं, “मेरे लिए ‘गिव टू गेन’ का मतलब है कि जब हम किसी दूसरी महिला के सपनों का साथ देते हैं, तो हम सब मिलकर मजबूत बनते हैं। इस महिला दिवस पर मैं उन लड़कियों को आत्मविश्वास देना चाहती हूँ जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए सीमाएँ तोड़ना चाहती हैं।”

‘घरवाली पेड़वाली‘ में लतिका का किरदार निभा रहीं प्रियंवदा कांत कहती हैं, “मेरे जीवन में कई भूमिकाएँ हैं-अपने काम के प्रति समर्पित एक अभिनेत्री, परिवार के प्रति जिम्मेदार एक बेटी और लगातार सीखने वाली एक महिला। मेरे लिए ‘गिव टू गेन’ का मतलब है दया देना, मार्गदर्शन देना और जहाँ संभव हो अवसर देना। जब हम किसी दूसरी महिला को आगे बढ़ाते हैं, तो हमें भी आत्मविश्वास और एकता मिलती है। सशक्तिकरण तब शुरू होता है जब हम एक-दूसरे का साथ देना चुनते हैं।”

‘हप्पू की उलटन पलटन‘ में राजेश की भूमिका निभा रहीं गीतांजलि मिश्रा कहती हैं, “एक महिला होने का मतलब है सहजता से कई जिम्मेदारियाँ निभाना। ‘गिव टू गेन’ मुझे यह याद दिलाता है कि हम जितना देते हैं, उतना ही अनुभव, साहस और दूसरों को प्रेरित करने की शक्ति भी पाते हैं।”

‘भाबीजी घर पर हैं‘ में अंगूरी भाबी का किरदार निभा रहीं शिल्पा शिंदे कहती हैं, “मेरा मानना है कि एक महिला होने का मतलब है हर भूमिका को पूरे दिल और दृढ़ता के साथ निभाना। इसलिए इस महिला दिवस पर एण्डटीवी के ‘सेल्फी लो, शाइन करो, स्टार बन जाओ!’ अभियान का हिस्सा बनकर मुझे बेहद खुशी हो रही है। यह एक खूबसूरत पहल है, जहाँ महिलाएँ क्राउन मिरर इंस्टॉलेशन के सामने सेल्फी लेकर खुद को आत्मविश्वासी, स्वतंत्र और मजबूत महसूस कर सकती हैं। ‘गिव टू गेन’ हमें याद दिलाता है कि जब हम अपने अनुभव साझा करते हैं, युवा महिलाओं का मार्गदर्शन करते हैं या बस उनका साथ देते हैं, तो सशक्तिकरण का एक मजबूत दायरा बनता है।”

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