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सीएम धामी पहुंचे नैनीताल, पर्यटकों की सुविधाओं और यातायात प्रबंधन की ली जानकारी

TIL Desk नैनीताल:👉उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी दो दिवसीय दौरे पर नैनीताल पहुंचे, जहां उन्होंने शुक्रवार सुबह भ्रमण के दौरान पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों के साथ शीतकालीन यात्रा व नए वर्ष के दृष्टिगत पर्यटकों की सुविधा हेतु की गई व्यवस्थाओं व यातायात प्रबंधन की समीक्षा की। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्थानीय लोगों से भेंट कर सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का फीडबैक लिया, साथ ही पर्यटकों से बातचीत कर प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं की जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने पार्किंग, बेहतर यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा अत्यधिक ट्रैफिक की स्थिति में वैकल्पिक रूट प्लान तैयार करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा प्रयास है कि देवभूमि उत्तराखंड आने वाला हर पर्यटक एक सुखद और अविस्मरणीय अनुभव लेकर वापस जाए। किसी भी पर्यटक को यहां पर आने में कोई परेशानी न हो, इसका विशेष ध्यान देने का अधिकारियों को निर्देश दिया।

इसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मल्लीताल स्थित गुरुद्वारे में मत्था टेककर गुरु महाराज का आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर उन्होंने संगत को प्रसाद वितरित किया। मुख्यमंत्री ने गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादों के बलिदान को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया और मृत्यु को सहर्ष स्वीकार किया। उनका यह त्याग देश-दुनिया के लोगों के लिए प्रेरणास्रोत है। आने वाली पीढ़ियों को साहिबजादों के बलिदान से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ना चाहिए और उनके आदर्शों को जीवन में आत्मसात करना चाहिए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “साहिबजादों के बलिदान को पूरा देश हमेशा याद रखेगा। वीर बाल दिवस के मौके पर मैं उनकी शहादत को सम्मान के साथ नमन करता हूं। उन्होंने जिंदा दीवार में चुनवा जाना पसंद किया, लेकिन अपना धर्म छोड़ना मंजूर नहीं किया। हमारे देश के बच्चों को उनके साहस और वीरता से सीखना चाहिए।”

सीएम धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “वीर बाल दिवस पर नैनीताल स्थित श्री गुरुद्वारा साहिब में मत्था टेका और धर्म एवं संस्कृति की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले साहिबजादे बाबा जोरावर सिंह जी एवं बाबा फतेह सिंह जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। यह अवसर केवल स्मरण का नहीं, बल्कि उस अद्वितीय त्याग और अदम्य साहस को आत्मसात करने का है, जिसने यह संदेश दिया कि धर्म, सत्य और राष्ट्र की रक्षा के लिए किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होता। बाल अवस्था में भी साहिबजादों ने जिस दृढ़ता, आस्था और वीरता के साथ अत्याचार का सामना किया, वह मानव इतिहास में अद्वितीय है।”

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