TIL Desk लखनऊ:
पसमांदा मुस्लिम समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनीस मंसूरी ने आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि-हज जैसे पवित्र सफर के लिए डिफरेंशियल एयरफेयर के नाम पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है।
अनीस मंसूरी ने कहा कि उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश से हज पर जाने वाले अधिकांश आजमीन पसमांदा तबके से आते हैं, जो सालों तक अपनी पाई-पाई जोड़कर इस पाक सफर की रकम जुटाते हैं। मंसूरी ने तीखे लहजे में सवाल उठाया जब हज का बजट महीनों पहले तय हो चुका था, तो रवानगी के समय यह अवैध वसूली किस आधार पर की जा रही है? क्या यह मान लिया गया है कि मजबूर हैं और उनसे कुछ भी वसूला जा सकता है? अभी तो हज मुकम्मल भी नहीं हुआ, सफर का पहला चरण शुरू हुआ है और सरकार ने हर हाजी को अपना कर्जदार बना दिया।
मंत्री और अधिकारियों की जवाबदेही पर प्रहार:
अनीस मंसूरी ने स्पष्ट रूप से केंद्रीय मंत्री किरन रिजीजू और हज कमेटी ऑफ इंडिया के सीईओ शनवास सी को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि उन्हें देश के सामने इस वसूली का वास्तविक आधार बताना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि फैसलों की जवाबदेही से बचने के लिए अधिकारियों के हस्ताक्षरों का सहारा लेना एक कायराना रणनीति है।
दानिश आजाद अंसारी को ‘आईना’:
अनीस मंसूरी ने उत्तर प्रदेश राज्य हज कमेटी के अध्यक्ष दानिश आजाद अंसारी और उनकी पूरी टीम की खामोशी पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने मांग की कि दानिश आजाद अंसारी दलगत राजनीति और अपनी कुर्सी के मोह से ऊपर उठें। हज कमेटी ऑफ इंडिया के इस ‘कुत्सित कृत्य’ की कड़े शब्दों में निंदा करें। हाजियों के हक के लिए आवाज उठाते हुए इस रू0 10,000 की बढ़ोतरी को वापस लेने की तत्काल मांग करें।
चेतावनी’ ‘सड़क से सत्ता तक उठेगी आह:
अनीस मंसूरी ने हुकूमत को चेतावनी देते हुए कहा कि पसमांदा मुस्लिम समाज इस अन्याय को बर्दाश्त नहीं करेगा। यदि यह आदेश वापस नहीं लिया गया और वसूली गई राशि लौटाई नहीं गई, तो यह केवल एक आर्थिक बोझ का मामला नहीं रहेगा। उन लाखों मजबूर हाजियों की ‘आह’ सीधे सत्ता के गलियारों तक पहुंचेगी और सरकार को इसका खामियाजा भुगतना होगा।
