- सरदार पटेल बौद्धिक विचार मंच ने कई संगठनों के साथ मिल कर किया मंथन
TIL Desk लखनऊ:
‘सरदार पटेल बौद्धिक विचार मंच’ ने देश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की सटीक जातिवार जनगणना सुनिश्चित करने के लिए अपनी आवाज़ बुलंद की है। मंच के महामंत्री जगदीश शरण गंगवार ने एक प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि मंच पिछले 8 वर्षों से समाज के बौद्धिक वर्गों जैसे—पूर्व सैन्य अधिकारी, प्रोफेसर, वैज्ञानिक, डॉक्टर, अधिवक्ता और व्यवसायियों के साथ मिलकर सामाजिक सुधार की दिशा में कार्यरत है।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में कुर्मी समाज की जनसंख्या 12 प्रतिशत से अधिक है। यह समाज राज्य की लगभग 300 विधानसभा सीटों पर हार-जीत तय करने की क्षमता रखता है और वर्तमान में भी बड़ी संख्या में इस समाज के प्रतिनिधि सदन में मौजूद हैं। जनगणना 2026 की विसंगतियो के अंतर्गत भारत सरकार के महारजिस्ट्रार द्वारा 22 जनवरी 2026 से शुरू होने वाली जनगणना के प्रारूप पर मंच ने आपत्ति जताई है। प्रारूप के क्रम संख्या 12 पर “क्या परिवार का मुखिया अनुसूचित जाति/जनजाति/अन्य से संबंधित है” वाले कॉलम में अन्य पिछड़ा वर्ग का स्पष्ट उल्लेख न होने से समाज में रोष है। मंच का मानना है कि इससे पिछड़ी जातियों की सही गणना नहीं हो पाएगी।
वार्ता के दौरान अरुण कुमार सिन्हा, पूर्व आई.ए.एस. एवं संस्थापक संरक्षक, डॉ. क्षेत्रपाल गंगवार, अध्यक्ष, रवीन्द्र सिंह गंगवार, वी.आर. वर्मा, मुनीश गंगवार, आर.एल. निरंजन, योगेन्द्र सचान, कुर्मी सभा लखनऊ से जय सिंह सचान, सरदार वल्लभभाई ट्रस्ट से के.सी. वर्मा, पटेल प्रतिनिधि सभा, लखनऊ से ज्ञान सिंह एवं अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा से योगेन्द्र सचान, छत्रपति शिवाजी शोध संस्थान से राजबहादुर सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किये।
सरकार से मांग की गई है कि ओबीसी जातियों के लिए जनगणना में अलग से कॉलम रखा जाए ताकि जातिवार आंकड़े स्पष्ट हो सकें। मंच ने कुर्मी समाज के लोगों से अपील की है कि जनगणना के समय वे अपनी उपजाति के साथ “कुर्मी” शब्द अवश्य लिखवाएं ताकि समाज की वास्तविक शक्ति का आकलन हो सके। इस मुहिम में मंच को अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा, कुर्मी सभा लखनऊ, छत्रपति शिवाजी संस्थान कानपुर और सरदार वल्लभभाई पटेल ट्रस्ट लखनऊ जैसे प्रमुख संगठनों का पूर्ण समर्थन प्राप्त है।
