TIL Desk कानपुर:
कानपुर में करोड़ों रुपये की संपत्ति को लेकर एक पारिवारिक विवाद अब कानूनी लड़ाई का रूप ले चुका है। 76 वर्षीय कैंसर पीड़ित वरिष्ठ नागरिक सुभाष चंद्र गुप्ता ने अपने बेटे, बहू, भाई और एक अन्य महिला के विरुद्ध गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस एवं प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि उनकी खराब स्वास्थ्य स्थिति का लाभ उठाकर कथित रूप से उनकी संपत्तियों पर कब्जा करने की कोशिश की गई। उनका आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए, हस्ताक्षरों का दुरुपयोग हुआ और करोड़ों रुपये की संपत्तियों का अनुचित तरीके से लेन-देन किया गया।
पीड़ित के अनुसार, मार्च 2025 में कुछ लोग जबरन उनके घर में दाखिल हुए और उन्हें मकान खाली करने के लिए धमकाया। उनका यह भी दावा है कि इस घटना के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब हो गए। इस संबंध में थाना कोहना में एफआईआर संख्या 41/2025 दर्ज कराई गई थी।
इसके अतिरिक्त, कथित फर्जी दस्तावेजों और संपत्ति से जुड़े मामलों में एफआईआर संख्या 59/2026 भी दर्ज होने की जानकारी दी गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि मामले की जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
सुभाष चंद्र गुप्ता ने आरोप लगाया कि आर्थिक नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को भी ठेस पहुंचाने का प्रयास किया गया। उनका कहना है कि उनके खिलाफ भ्रामक शिकायतें और गलत सूचनाएं फैलाकर उनकी छवि खराब करने की कोशिश की गई।
शिकायत में जिन लोगों के नाम शामिल हैं, उनमें आशीष गुप्ता, मानिका गुप्ता, राजकुमार गुप्ता (मुन्ना भैया) तथा संध्या गुप्ता शामिल हैं। शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया है कि पूर्व में पुलिस द्वारा आशीष गुप्ता पर ₹20,000 और राजकुमार गुप्ता पर ₹50,000 का इनाम घोषित किया गया था।
भावुक होते हुए वरिष्ठ नागरिक ने कहा कि जिस बेटे को उन्होंने जीवनभर सहारा दिया, आज उसी के विरुद्ध अपनी संपत्ति और सम्मान की रक्षा के लिए उन्हें अदालत और पुलिस के दरवाजे खटखटाने पड़ रहे हैं।
उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराई जाए तथा यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के विरुद्ध कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
(अस्वीकरण: इस समाचार में वर्णित आरोप शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले की जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया जारी है। सभी आरोपितों को अपना पक्ष रखने का पूर्ण अधिकार है।)
