TIL Desk लखनऊ:
उद्घाटन भाषण में मेडिकल टेक्नोलॉजी एसोसिएशन ऑफ इंडिया (MTaI) के चेयरमैन पवन चौधरी ने लगातार निवेश, मैन्युफैक्चरिंग के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और आरएंडडी पर ग्लोबल नजरिया पेश करते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा मैडटेक (MedTech) मैन्युफैक्चरिंग हब कैसे बन सकता है। मीडिया से बात करते हुए चौधरी ने कहा, “उत्तर प्रदेश एक मैन्युफैक्चरिंग की भरोसेमंद डेस्टिनेशन के तौर पर उभर रहा है, जिसे मजबूत गवर्नेंस, बिजनेस सुलभता और मजबूत लॉजिस्टिक्स ढांचे का प्रोत्साहन मिला है।“
संस्थागत क्षमता बनाने के लिए राज्य की सक्रिय प्रतिबद्धता लंबे समय के औद्योगिक निवेश के लिए एक मजबूत और उच्च विकास का माहौल बना रही है।हॉस्पिटल हब रणनीति – मेडिकल टेक्नोलॉजी सेक्टर की खास जरूरतों पर जोर देते हुए चौधरी ने कहा कि मैडटेक इकोसिस्टम को बनाए रखने के लिए सिर्फ भौतिक इंफ्रास्ट्रक्चर ही काफी नहीं है। उन्होंने राज्य के लिए एक विवेकपूर्ण विजन साझा करते हुए कहा: “एक मजबूत हॉस्पिटल नेटवर्क बेहद जरूरी है, और उत्तर प्रदेश का हैल्थकेयर फुटप्रिंट वास्तव में बहुत शानदार है। शहर नदी किनारे बसे; मैडटेक क्लस्टर हॉस्पिटल हब के आस-पास बढ़ते हैं। मेडिकल टेक्नोलॉजी वहीं फलती-फूलती है जहाँ एक बड़ा, सक्रिय हैल्थकेयर डिलीवरी सिस्टम होता है, क्योंकि वहीं टेक्नोलॉजी का परिक्षण किया जाता है, बेहतर बनाया जाता है, उसकी पुष्टि की जाती है और जिम्मेदारी से बढ़ाया जाता है।”
उन्होंने आगे कहा कि लखनऊ, कानपुर और मेरठ में स्थित प्रमुख संस्थानों के सहारे खड़ी उत्तर प्रदेश की व्यापक स्वास्थ्य व्यवस्था, और आयुष्मान भारत के व्यापक नेटवर्क से मिलने वाली मजबूती, मेडटेक मैन्युफैक्चरिंग के लिए महत्वपूर्ण विस्तार और मांग उपलब्ध कराती है। यही व्यापक आधार स्थानीय स्तर पर मेडटेक मैन्युफैक्चरिंग की व्यवहार्यता को सुदृढ़ करता है और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षमता को मजबूत करता है।
साझेदारी के साथ आगे बढ़ने का रास्ता – अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों क्षमताओं का लाभ उठाने वाले एक संतुलित नीतिगत ढांचे की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए श्री चौधरी ने कहा: “वैश्विक कंपनियां उन्नत तकनीक और गुणवत्ता मानकों के माध्यम से मार्केट तैयार करती हैं, जबकि भारतीय कंपनियां व्यापक पैमाने पर पहुंच के लिए जरूरी किफायत और स्केल उपलब्ध करती हैं। साथ मिलकर वे एक सहक्रियात्मक साझेदारी का निर्माण करती है, जो गुणवत्ता और पहुंच के दोहरे लक्ष्य को आगे बढ़ाती है। आवश्यक है कि नीति निर्माण द्वारा इस साझेदारी को निरंतर सक्षम बनाया जाए, ताकि अंतिम छोर तक मरीजों के लिए अधिकतम स्वास्थ लाभ सुनिश्चित किया जा सके।”
