TIL Desk लखनऊ:
सिंटेक्स ने अपने फ्लोटिंग बायोगैस प्लांट के माध्यम से देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों में सहयोग देने की घोषणा की है। अपनी उन्नत तकनीक के जरिए कंपनी गोबर और अन्य जैविक अवशेषों को स्वच्छ ऊर्जा और जैविक खाद में बदलने का समाधान उपलब्ध करा रही है।
वेलस्पन बीएपीएल के प्रबंध निदेशक एवं सिंटेक्स के निदेशक यशोवर्धन अग्रवाल ने कहा, “यदि हर गौशाला ऊर्जा उत्पादन का केंद्र बन जाए, तो देश का हर गांव आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है। हमारे फ्लोटिंग बायोगैस प्लांट की तकनीक गोबर और भोजन के अवशेषों से भरोसेमंद रसोई गैस तैयार करने के साथ-साथ उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद भी उपलब्ध कराती है। प्रतिदिन लगभग 100 किलोग्राम गोबर अथवा जैविक अवशेषों से संचालित एक प्लांट हर महीने लगभग 130-135 किलोग्राम एलपीजी की बचत कर सकता है। इसके साथ ही यह जैविक खेती के लिए उपयोगी बायो-स्लरी भी उपलब्ध कराता है।”
सिंटेक्स पिछले 25 वर्षों से फ्लोटिंग बायोगैस प्लांट का निर्माण कर रहा है। इन प्लांट्स के रखरखाव पर लगभग नगण्य खर्च आता है। इन्हें कम समय में स्थापित किया जा सकता है और आवश्यकता पड़ने पर दूसरी जगह स्थानांतरित भी किया जा सकता है। फ्लोटिंग तकनीक के कारण इनमें लगातार समान गैस दबाव मिलता है, जिससे इनका संचालन अधिक विश्वसनीय और सुविधाजनक बनता है। इन प्लांट्स को जमीन के ऊपर या नीचे, दोनों प्रकार से स्थापित किया जा सकता है। साथ ही, ये नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) की बायोगैस योजना के तहत अनुमोदित हैं, जिससे पात्र परियोजनाओं को सरकारी वित्तीय सहायता प्राप्त करने की सुविधा भी मिलती है.
