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ED की FIR में सनसनी: विदेशी फंडिंग का नक्सल क्षेत्रों में इस्तेमाल का आरोप

नई दिल्ली
 क्या ईसाई धर्म प्रचार की आड़ में विदेशी फंडिंग से देश विरोधी एक ऐसा नेटवर्क खड़ा किया जा रहा था, जो एक हजार से ज्यादा डेबिट कार्डों के जरिए करोड़ों रुपये निकालकर नक्सल प्रभावित एरिया में खर्च हो रहा था? दरअसल, ED की शिकायत पर रविवार को FIR दर्ज की गई है। आरोप है कि देश के लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज्म (LWE) से प्रभावित इलाकों समेत विदेशी डेबिट कार्ड के नेटवर्क के जरिए विदेशी फंड का गैर-कानूनी इस्तेमाल किया जा रहा है।

    ईडी की शिकायत पर अमेरिका की मिशनरी संस्था 'द टिमोथी इनिशिएटिव' (TTI) और छह अन्य के खिलाफ चौंकाने वाले दावे किए गए हैं।
    बेंगलुरु के कोथनूर पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के मुताबिक, अप्रैल में हुई ईडी की छापेमारी के दौरान विदेशी फंडिंग के इस्तेमाल का एक नेटवर्क मिला।
    दावा है कि नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच करीब 92.55 करोड़ रुपये विदेशी स्रोतों से मिले फंड का यूज FEMA और FCRA नियमों का उल्लंघन करते हुए किया गया।
    आरोपियों पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल, गैरकानूनी गतिविधियों को बढ़ावा देने और UAPA के तहत आतंकवादी गतिविधियों की साजिश जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
    डेबिट कार्ड के नेटवर्क के जरिए विदेशी फंड का गैर-कानूनी इस्तेमाल का दावा
    अमेरिकी मिशनरी संस्था TTI समेत सात पर एफआईआर दर्ज की गई है

US नागरिक से 24 डेबिट कार्ड मिले
ईडी से जुड़े सूत्रों ने बताया कि FIR में जोनाथन एस राजन, मीका मार्क, अजीत वर्गीस मथाई, वर्गीस चाको, बबलू कुर्मी, सुप्रीम जॉय, अमेरिकी बेस्ड 'द टिमोथी इनिशिएटिव' और अन्य को आरोपी बनाया गया है। मामले की शुरुआत उस समय हुई जब अमेरिकी नागरिक माइका मार्क को 18 अप्रैल को बेंगलुरु एयरपोर्ट पर रोका गया। उसके पास 24 विदेशी डेबिट कार्ड मिले। ऐसे 1000 से ज्यादा कार्ड देशभर में इस्तेमाल किए जा रहे थे। कई कार्डों पर एक ही नाम 'संतोष कुमार' दर्ज था।

नक्सल क्षेत्र में 6.34 करोड़ की निकासी
FIR के मुताबिक, धमतरी, बस्तर और अन्य नक्सल प्रभावित इलाकों में पिछले कुछ सालों के दौरान करीब 6.34 करोड़ रुपये निकाले गए। सूत्रों ने दावा किया कि इतनी बड़ी मात्रा में कैश निकासी किसी संगठित नेटवर्क की ओर इशारा करती है। आशंका जताई गई कि यह पैसा नक्सल प्रभाव वाले इलाकों तक पहुंचाया गया है। जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।

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