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चंदा कोचर आईसीआईसीआई बैंक Vs चंदा कोचर पति Vs वीडियोकोन घोटाला …

चंदा कोचर आईसीआईसीआई बैंक Vs चंदा कोचर पति Vs वीडियोकोन घोटाला ...
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TIL Desk/ #Business– #आईसीआईसीआईबैंक जिसने सामान्य बैंकिंग को गुंडा बैंकिंग पैसा वसूली प्रणाली को जन्म दिया | लोन की रकम वसूलने के लिए स्थानीय गुंडों का सहारा लेने का भी लगातार इल्ज़ाम लगता रहा | न्यायलय के हस्तक्षेप के बाद ऐसी वारदातों पर कुछ हद तक काबू पाया जा सका | लेकिन तब तक कई परिवार के पुरषों ने आईसीआईसीआई बैंक द्वारा की जाने वाली असंवैधानिक कार्यवाही के कारण आत्महत्या कर ली | आज उसी बैंक की सर्वे सर्वे रही, बैंक की एमडी व सीईओ रही चंदा कोचर की प्रतिष्ठा को उनकी नीतियों और उनके के काले कारनामो के कारण और उनके मित्रो पर लुटाये गए जनता के पैसो के कारण कटघरे में खड़ा कर दिया है । 
चंदा कोचर के नामचीन चेहरे को उनकी करनी ने अमावस कर दिया | आसमान पर चमकता हुआ सुनहरा चेहरा एक तारे की तरह टूटकर मिट्टी-मिट्टी हो गया |

आइसीआइसीआइ बैंक ने #वीडियोकॉन ग्रुप को 2012 में 3,250 करोड़ रुपये का कर्ज दिया। उस वक्त कोचर आइसीआइसीआइ बैंक की एमडी व सीईओ थीं। वीडियोकॉन ग्रुप के प्रमोटर #वेणुगोपालधूत ने चंदा कोचर के पति #दीपककोचर और कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर न्यूपावर रिन्युएबल्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की एक पवन ऊर्जा कंपनी गठित की और आरोपों के मुताबिक कर्ज मिलने के कुछ ही महीने बाद इसमें करोड़ों रुपये का निवेश किया। बाद में धूत ने इस कंपनी का स्वामित्व दीपक कोचर को सौंप दिया। इस बीच, कर्ज चुकता नहीं होने की वजह से बैंक ने 2017 में वीडियोकॉन ग्रुप को दिए इस कर्ज को फंसे कर्ज (एनपीए) में बदल दिया।

पिछले वर्ष इसी समय के आसपास वह देश की बैंकिंग सेक्टर का जगमगाता सितारा थीं, देश में किसी बैंक के शीर्ष पर पहुंचने वाली पहली महिला, दुनियाभर में भारतीय बैंकिंग सेक्टर की पोस्टर गर्ल, दर्जनों घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग और कारोबारी संगठनों की सदस्य और कुछ की प्रमुख, सरकार के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में एक पद्म भूषण से सम्मानित…

जिनका अनुसरण करने और जिनकी ऊंचाई तक पहुंचने का सपना प्रबंधन और बैंकिंग क्षेत्र में काम करने वाली लाखों युवा महिलाएं देखा करती थीं। एक वर्ष बाद आज वह सन्न और सदमे में हैं। सन्न होना स्वाभाविक है। आखिर जिस बैंक को उन्होंने अपनी जिंदगी के कीमती 34 वर्ष दिए, जिसे अपनी मेहनत, लगन और सूझबूझ (जिस पर अभी सबसे ज्यादा सवाल उठाए जा रहे हैं) से देश के सबसे भरोसेमंद और अग्रणी बैंकों की सूची में सबसे आगे के पायदानों पर खड़ा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, उसी बैंक से इस तरह की विदाई की खुद उन्हें भी उम्मीद नहीं रही होगी।

चंदा कोचर की बर्खास्तगी कई और ऐसे महत्वपूर्ण सवाल खड़े करती है, जिनका देश के बैंकिंग सेक्टर और अन्य सेक्टरों के लिए भी जवाब खोजना बेहद जरूरी है। यह सिर्फ चंदा कोचर और आइसीआइसीआइ बैंक (जिसके निदेशक बोर्ड से सबसे ज्यादा सवाल होने चाहिए) का नहीं, बल्कि भारतीय बैंकिंग सेक्टर के उस लचर कॉरपोरेट गवर्नेंस का सवाल है, जिस पर पूरी तरह से नए युग की ओर चल पड़े देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की जिम्मेदारी है।

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