रांची
आयुष्मान योजना में गड़बड़ी को लेकर ईडी ने शुक्रवार को राज्य की कई जगहों पर छापेमारी की। आयुष्मान योजना के जरिए फर्जी क्लेम कर राज्य के 212 निजी अस्पतालों ने गलत तरीके से भुगतान ले लिया था। जांच के क्रम में ऐसे कई केस आए, जब मरीज को अस्पताल में भर्ती किए बिना ही उसके इलाज का क्लेम लेकर पैसे ले लिए गए। वहीं, मृत लोगों का इलाज दिखाकर भी पैसे लेने का मामला सामने आया था। जांच के दौरान 104 और 108 के जरिए भी जानकारी ली गई। जिससे खुलासा हुआ कि इन सेवाओं के जरिए जिन मरीजों की अस्पताल में भर्ती दिखायी गई, वह अस्पताल में भर्ती ही नहीं हुए थे।
जमशेदपुर में नौ घंटे तक की गई छानबीन
जमशेदपुर में ईडी की टीम ओमप्रकाश सिंह के मानगो में नीलगिरी कॉलोनी स्थित आवास पर सुबह सात बजे पहुंची। चार सदस्यीय टीम दो वाहनों से पहुंची थी। टीम के साथ सीआरपी के पांच जवान भी थे। छापेमारी की सूचना पूर्व में स्थानीय पुलिस को नहीं दी गयी थी। कार्रवाई के दौरान ईडी के अधिकारी कई बार बालकनी में आए। उनके साथ एक महिला अधिकारी भी थीं। वहां नौ घंटे तक छानबीन की। इस दौरान दो लाख नकद, दो फाइल और जमीन से जुड़े कागजात को टीम ने जब्त कर लिया। छापेमारी के दौरान ईडी ने बाहर से ही मंगाकर खाना खाया। दोपहर 12 बजे घर का एक सदस्य बाहर निकलने लगा तो उसे रोक दिया गया। उसके बाद जवानों ने गेट अंदर से बंद कर दिया। छापेमारी की जानकारी मिलते ही ओमप्रकाश के घर जाने वाली सड़क पर सन्नाटा पसर गया। इक्का-दुक्का लोग ही वहां से गुजर रहे थे।
घरेलू खर्च के थे रुपये
सिमडेगा से आए ओमप्रकाश के साले आकाश सिंह ने बताया कि जो कागजात घर में उपलब्ध थे, उन्हें ईडी की टीम के सामने रखा गया। इनमें से कुछ कागज एजेंसी अपने साथ ले गए। साथ ही दो लाख रुपये नगद घर में रखे हुए थे उसे भी वे ले गए। यह रुपये घरेलू खर्च के थे।
हजारीबाग में एके सनशाइन हॉस्पिटल में छापा
हजारीबाग में आयुष्मान भारत योजना में गड़बड़ी को लेकर शुक्रवार को छह सदस्यीय टीम हजारीबाग मासीपीढ़ी के पंचशील कॉलोनी स्थित एके सनशाइन हॉस्पिटल पहुंची। यह ईडी की टीम ने अस्पताल में नौ घंटे तक विभिन्न फाइलों को खंगाला। जानकारी के अनुसार ईडी की टीम सुबह छह बजे से शाम 3:30 बजे सर्च किया। हॉस्पिटल के मुख्य गेट को अंदर से बंद कर अस्पताल के सभी रजिस्टर, कंप्यूटर, आय व्यय समेत अन्य रजिस्टर को खंगाला गया। अंदर से किसी को बाहर और बाहर से किसी को अंदर आने जाने नही दिया गया। यह टीम दो इनोवा कार और एक लोकल कार से आई थी। इस छापेमारी टीम में चार फोर्स और छह ऑफिसर्स शामिल थे। चारों फोर्स हॉस्पिटल के गेट पर तैनात थे। तैनात फोर्स किसी भी बाहरी लोगों को प्रवेश नहीं करने दे रहे थे। टीम के अधिकारियों ने सुबह छह बजे से शाम तीन बजे तक हॉस्पिटल में जांच पड़ताल की।
गुमला में 12 घंटे तक चली ईडी की छापेमारी
गुमला जिला मुख्यालय के डीएसपी रोड स्थित जवाहर नगर निवासी दया शंकर चौधरी के घर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने शुक्रवार को लगभग 12 घंटे तक छापेमारी की। ईडी की टीम सुबह छह बजे पहुंची और शाम 6 बजे जांच पूरी कर रांची रवाना हुई। दया शंकर चौधरी फिलहाल गिरिडीह में आयुष्मान योजना से हैं। योजना के शुरुआती चरण में वे सदर अस्पताल गुमला में कार्यरत थे। जांच के दौरान घर में किसी को भी प्रवेश नहीं करने दिया गया। ईडी के नौ अधिकारी-कर्मी दो कारों में सवार आज गुमला पहुंचे थे। टीम ने सघन जांच अभियान चलाया। इस दौरान दया शंकर चौधरी घर में ही मौजूद था, जिससे ईडी ने घंटों पूछताछ की। हालांकि ईडी अधिकारियों ने छापेमारी से जुड़ी कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की और ईडी कार्यालय से जानकारी लेने की सलाह दी। इधर, ईडी के कार्रवाई से हड़कंप मची है।
जांच में गड़बड़ी सामने आने के बाद 40 करोड़ से अधिक का भुगतान रोका गया
जांच में गड़बड़ी सामने आने के बाद 40 करोड़ से अधिक का भुगतान अस्पतालों को रोका गया था। जांच में यह बात सामने आयी थी कि निजी अस्पतालों ने 250 ऐसे लोगों के नाम पर भी भुगतान लिया था, जिनकी मौत इलाज के पहले हो चुकी थी। कैग की रिपोर्ट में पहली बार गड़बड़ी सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग के द्वारा मामले की जांच की गई थी। वहीं, ईडी ने भी विभाग से पूरा विवरण साल 2024 में ही मांगा था। ईडी को जानकारी मिली थी, जिसमें विभाग ने आयुष्मान योजना में हुई गड़बड़ी व दर्ज कांडों का विवरण दिया था। राज्य के 13 अस्पतालों की सूची भी ईडी को दी गई थी, जहां से सर्वाधिक 500 से अधिक फर्जी दावे सामने आए थे। इन कांडों के आधार पर ही ईडी ने ईसीआईआर दर्ज की थी।